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“ॐ नमः शिवाय” आज सावन का अंतिम सोमवार, इन शुभ योग में पूजा से होगी सौभाग्य की प्राप्ति

भगवान शिव के प्रिय मास सावन का पहला और अंतिम सोमवार का विशेष महत्व होता है। 3 अगस्त को सावन का पांचवा सोमवार है और यह कई मायनों में बहुत खास है। इस दिन रक्षा बंधन के साथ-साथ ग्रह-नक्षत्रों का अद्भुत संयोग भी बन रहा है। इन शुभ योग में आसानी से भगवान शिव की पूजा और उपासना करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। सावन मास 6 जुलाई से शुरू हुआ और 3 अगस्त को खत्म हो रहा है। इस बार भक्तों ने वायरस खत्म करने की प्रार्थना की। आइए जानते हैं सावन के अंतिम सोमवार पर बन रहे इन शुभ योग के बारे में…

2/7 पृथ्वी भ्रमण करते हैं अंतिम दिन

पुराणों के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव अपने परिवार में समेत पृथ्वी पर आते हैं और यहीं से सृष्टि का संचालन करते हैं और वहीं सावन की पूर्णिमा के दिन भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी भ्रमण पर निकलते हैं और भक्तों को आशीर्वदा देते हैं। इसलिए सावन के अंतिम दिन का विशेष महत्व होता है।

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3/7 सभी मनोकामना करते हैं पूरी

शिवपुराण में बताया गया है कि सावन मास में भगवान शिव ने माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उनको पत्नी रूप में स्वीकार किया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि जो भी सच्चे मन मानव कल्याण के लिए सावन के महीने में पूजा करेगा, उसकी सभी मनोकामनाओं को मैं पूरी करूंगा। इस दिन भगवान शिव के नील कंठ, नटराज और महामृत्युंजय स्वरूप की पूजा करनी चाहिए और इनका जप करना चाहिए।

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4/7 सुननी चाहिए यह कथा

इस बार सावन मास की शुरुआत सोमवार हुई है और अंतिम दिन भी सोमवार है इसलिए यह सावन कई मायनों में विशेष फल देने वाला है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के पांच सोमवार भगवान शिव के पांच मुख के प्रतिक होते हैं। इस दिन भगवान शिव की पंचमुख की कथा पढ़ने और सुनने का विशेष महत्व होता है। ऐसा करने से इंसान की समस्त मनोकामना पूरी होती हैं।

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5/7 इनकी पूजा से मिलेगी हर क्षेत्र में सफलता

सावन के अंतिम सोमवार के दिन चंद्रमा मकर राशि में होने के कारण प्रीति योग बन रहा है और इसका महत्व और बढ़ाने के लिए आयुष्मान योग भी बन रहा है। इस दिन सावन पूर्णिमा भी है, चंद्रमा को पूर्णिमा का देवता कहा जाता है और चंद्रमा को भगवान शिव अपने सिर पर स्थान देते हैं। इससे सोमवार का और भी महत्व बढ़ जाता है। इस दिन चंद्र देव की पूजा करने से आपको हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

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6/7 बढ़ जाएगा रक्षा बंधन का महत्व

सावन के अंतिम दिन इन शुभयोग में रक्षाबंधन का त्योहार भी है। इससे भाई-बहन के इस त्योहार का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन भाई-बहन साथ मिलकर साथ मिलकर व्रत और पूजा करें तो उनको कभी किसी चीज का कष्ट नहीं होगा। साथ ही इस दिन पितरों का तर्पण और ऋषि पूजन किया जाता है। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है, जिससे घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है।

7/7 बन रहे हैं ये महायोग

सावन सोमवार के अंतिम दिन प्रीति योग, आयुष्मान योग और सर्वार्थसिद्धि योग के साथ सोमवती पूर्णिमा, मकर राशि का चंद्रमा, श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में सावन माह के आखिरी सोमवार के दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा और 4 अगस्त से भाद्र मास शुरू हो जाएगा। इस मौके पर शिवजी का दूध से अभिषेक करने पर लाभ प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होति है।

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