मुजफ्फरपुर के मीनापुर में बूढ़ी गंडक के पानी के फैलने का सिलसिला चौथे रोज सोमवार को भी जारी रहा। अब तक 90 गांव के करीब दो लाख से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। बाढ़ में घिरे एक दर्जन गांव से लोगों का पलायन जारी है। इस बीच बीडीओ और सीओ के फोन नहीं उठाने से लोगों में आक्रोश है।
सबसे बुरा हाल खरार ढाब का है। गांव के 270 घरों में अचानक बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से पांच दर्जन से अधिक लोग गांव में बने सरकारी स्कूल के छत पर फंस गए हैं। स्कूल की छत पर मौजूद जगदीश सहनी बताते हैं कि पांच बेटा और बहू समेत 16 लोगों के साथ पिछले 24 घंटे से छत पर हैं। नागेन्द्र सहनी और उनकी पत्नी तिलिया देवी अपने दो छोटे बच्चों के साथ छत पर हैं। गांव के उपेन्द्र सहनी बतातें हैं कि वे अपनी पत्नी गीता देवी और चार बच्चों के साथ समीप के जामिन मठियां बांध पर प्लास्टिक तान कर रहने को मजबूर है। गांव के लोगों में प्रशासन की ओर से मदद नहीं मिल पाने का मलाल है। लोगों ने बताया कि अधिकारी फोन भी नहीं उठाते हैं।
इसी प्रकार रघई पुल के समीप करीब 500 परिवार पिछले चार रोज से सड़क पर है। शिवहर सड़क पर हाईस्कूल के समीप करीब पांच दर्जन परिवार तंबू में है।

ये लोग मीनापुर और पुरैनिया मुशहर टोली गांव से विस्थापित होकर यहां आए हैं। सुनैना देवी सहित कई लोगों ने बताया कि बारिश और धूप से बचना मुश्किल हो रहा है। गंगबरार के चिंताहरण पासवान बताते हैं कि बांध से सटे दर्जनों घर में बाढ़ का पानी भर जाने से लोग बांध पर शरण ले चुके हैं। शहीद जुब्बा सहनी के गांव चैनपुर के अधिकांश घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। मुखिया अजय कुमार बताते हैं कि गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट चुका है। इस बीच बूढ़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से स्थिति और अधिक बिगड़ने का खतरा मंडराने लगा है।



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