मुजफ्फरपुर, Muzaffarpur Water logging : मंगलवार को दिन में हुई भारी बारिश से शहर एक बार फिर पानी-पानी हो गया। शहर के अधिकांश गली-मोहल्लों में बारिश का पानी जमा हो गया। कई लोगों के घरों एवं दुकानों में फिर से पानी प्रवेश कर गया है। पिछले तीन दिनों तक बारिश नहीं होने से मुख्य सड़कों एवं मोहल्लों से पानी निकल जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन एक बार फिर जलजमाव होने से उनकी जिंदगी आ’फत में फंस गई है। सबसे ज्यादा पीड़ा निचले इलाके में बसे लोगों को हो रही है जो पिछले दस दिनों से गंदे पानी के तालाब के बीच रह रहे हैं। जमा पानी दूषित हो जाने के कारण लोगों को महामा’री की चिंता सता रही है। जमा पानी निकालने को निगम के अधिकारी एवं कर्मचारी जूझ रहे है। लेकिन बारिश होते ही उनकी मेहनत पर पानी फिर जा रहा है।
लोगों के घरों में पानी घुसा
मंगलवार को हुई बारिश से शहर एकबार फिर टापू बन गया। मोतीझील, जवाहरलाल रोड, आमगोला, क्लब रोड, बेला, चक्कर मैदान रोड, बीबी गंज, रघुवंश रोड, संजय सिनेमा रोड में एक से दो फीट पानी लग गया। सैकड़ों लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर जाने से उनको नारकीय हालात का सामना करना पड़ा। निचले इलाके से पिछले तीन दिनों में जितना पानी निकला था उससे दोगुना पानी वहां जमा हो गया है।

नदी, नाला व बारिश के पानी से तबाह एक दर्जन मोहल्ले
एक और जहां बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर बढऩे से उसकी पेटी में बसे मोहल्ले पूरी तरह से डूब चुके हैं वहीं शहर के उत्तरी एवं पूर्वी भाग स्थित सभी स्लूस गेट बंद होने के करण आधा दर्जन मोहल्ले जल निकासी नहीं होने के कारण बारिश एवं नाला के पानी में डूबे हुए हैं। सैकड़ों परिवार इसकी चपेट में हैं। नगर निगम आधे दर्जन स्थानों पर पंङ्क्षपग सेट लगाकर जमा पानी को निकलाने काम कर रहा है।
वहीं नदी के पानी का दबाव स्लूस गेट पर बढ़ रहा है जिससे कई जगह रिसाव हो रहा है। इससे लोगों मेंं दह’शत का माहौल है। सोमवार को देर रात्रि चंदवारा स्लूस गेट से रिसाव होने पर स्थानीय लोगों ने मिट्टी-बालू डालकर रोका था। स्लूस गेट बंद होने से बारिश के साथ नाला के पानी में डूबे सिकंदरपुर, बालूघाट, चर्च रोड चंदवारा, हाल साहब की कोठी, पानी कल कैंपस रोड, गरीब स्थान रोड समेत कई मोहल्ले में त्रा’हिमाम की स्थिति है। सभी मोहल्ले गंदे पानी के तालाब में तब्दील हो गए है। इन मोहल्लों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को नारकीय हालात में जीने को मजबूर होना पड़ रहा है।



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