BIHARBreaking NewsSTATE

डॉक्टर उत्तम कुमार सिंह जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

डॉक्टर उत्तम कुमार सिंह जी का असमय जाना समाज और शिक्षा जगत के लिये
अपूरणीय क्षति है। डॉ सिंह जी मैनेजमेंट गुरु स्वर्गीय डॉ टी एन चौधरी जी के प्रियतम छात्रों में अग्रणी थे।

डॉ सिंह मूलतः मुंगेर के निवासी थे, 1977 में मुज़फ़्फ़रपुर में एम बी ए करने आये थे।अमेरिका से टेक्सास टेक से सर्वोच्च अंक से एम बी ए पूरा कर अपने जन्म स्थली मुज़फ़्फ़रपुर को मैनेजमेट शिक्षा का केंद्र बिहार में बनाने के मिशन के साथ आए थे ।

एम बी ए करने के दौरान उन्हीने अपने गुरु डॉक्टर चौधरी जी से प्रेरणा लेकर बिहार में एक और मैनेजमेंट संस्थान खोलने की मंशा ज़ाहिर की जब उनकी कोर्स समाप्ति पर ही थी तब उनके साथ उनके कॉलेज के ही मित्र – जो आज प्रख्यात पर्यावरणविद है – डॉक्टर प्रियरंजन त्रिवेदी, का साथ मिला और उन्होंने 15 नवंबर 1978 को समस्तीपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री कर्पूरी ठाकुर जी के द्वारा पटेल मैदान में उद्घाटन करवाया आगे चल कर पटना में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन के नाम से विकसित किया। उन्होंने समय – समय पर शिक्षा के क्षेत्र में बहुत से रचनात्मक प्रयोग भी किये और साथ साथ तकनीक के साथ भी कदम से कदम मिलाते गए।

कंप्यूटर एजुकेशन का नीव उन्होंने बड़ी मजबूती से रखा। उन्होंने दूरस्थ शिक्षा का महत्व भी समझा और इसी परिकल्पना के साथ उन्होंने डॉक्टर ज़ाकिर हुसैन इंस्टीट्यूट की भी स्थापना की और इसके साथ उन्होंने कई वोकेशनल कोर्सेज, पत्रकारिता और कम्युनिटी कॉलेज का भी प्रसार किया। अतिश्योक्ति नहीं होगा कहना कि इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी में उनका प्रमुख योगदान रहा है और बिहार राज्य में इसका लाभ लाखों छात्रों को हुआ, जो रोजगार और स्वरोजगार में लाभान्वित हुए। इग्नू, सिक्किम मणिपाल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का प्रमुखता से प्रचलित किये। पूरे देश में एक पूरे दशक तक एडमिशन के संख्यां में पहले नम्बर पर बने रहे। उन्होंने राज्य के बाहर बंगलौर, पुणे, भुनेश्वर आदि जगह भी संस्थान की शाखाएं खोली।

डॉक्टर सिंह ने हमेशा गुणवत्ता में अपने लकीर बड़ी खींची और वे कभी भी उनसे छोटे संस्थान के विकास में बाधक नहीं बने । जब भी यूनिवर्सिटी की अगर कोई कठोर नीति दूसरे के विकास के लिए बाधक होती तो वो उनके हित के लिए अपनी बात बुलंदी से खुले मंच से सर्व-हित में बिना किसी हिचकिचाहट या लाग लपेट के स्पस्ट शब्दों में उनके लिए स्वेच्छा से रखा करते थे एक सफल नेतृत्व के साथ, जबकि उस नीति से उनको फर्क नहीं पड़ता एक विशाल संस्थान के रूप में । जैसे कहा जाता है कि एक बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है , उनका स्वभाव इससे ठीक विपरीत था, वे एक स्वस्थ प्रति स्पर्धा में विश्वास रखते थे।

डॉक्टर सिंह हमेशा हंसमुख , स्पस्टवादी और टीम वर्क में विश्वास रखते थे, तभी तो उनके सहयोगी वर्षों से उनके साथ बने रहे हैं । उनका ही स्लोगन ” पढ़ो वोकेशनल बनो प्रोफेशनल ” कई लोगों का सफलता का मूलमंत्र साबित हुआ। उन्होंने सफलता की ऊँची उड़ान के बावजूद अपने गुरु स्वर्गीय डॉक्टर टी एन चौधरी के लिए हमेशा सम्मान की भावना रखी और हमेशा स्नेह और आशीर्वाद उनके साथ हमेशा रहा। मुझे उनसे एक बड़े भाई की तरह हमेशा स्नेह मिलता रहा है और वो मुझे एक मार्ग-दर्शक की तरह हमेशा उत्साहित करते रहते थे ।

एक सफल समाज सेवी के रूप में वो लायन्स क्लब से जुड़े हुए थे। वे लायंस क्लब ऑफ़ नव्या विहार के उपाध्यक्ष थे, और इस क्लब के माध्यम से कई कल्याणकारी कार्यक्रम भी सम्पादित कराते रहे हैं।

Input : यशस्वी आलोक एफबी

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.