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श्रद्धालु बाबा गरीबनाथ पर 61 वर्ष में पहली बार नहीं चढ़ा सकेंगे कांवर, जानिए हर साल कितने श्रद्धालु चढ़ाते थे जल…

इस बार बाबा गरीबनाथ की नगरी में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला नहीं लगेगा। 61 सालों में यह पहला मौका होगा जब श्रद्धालु बाबा पर सावन महीने में कांवर नहीं चढ़ा सकेंगे। मालूम हो कि कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने एक जुलाई से मंदिर के पट को बंद रखने का निर्णय लिया है।

बीते वर्ष करीब पांच श्रद्धालुओं ने यहां जलाभिषेक किया

बाबा गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पं. विनय पाठक ने बताया कि कुछ लोगों ने वर्ष 1959 के आसपास पहलेजा से जल लेकर पहला कांवर चढ़ाया था। उस समय करीब 15-20 श्रद्धालुओं ने कांवर चढ़ाया था। तबसे यह प्रथा चली आ रही। इसके बाद हर साल सावन के महीने में कांवर चढ़ाने वाले भक्तों की संख्या बढ़ती गई। बीते वर्ष करीब पांच से सात लाख श्रद्धालुओं ने यहां जलाभिषेक किया था।

20 मार्च को बंद किया गया था मंदिर का पट

कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने 20 मार्च 2020 को श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का पट बंद किया था। लॉकडाउन के दौरान मंदिर के पुजारी बाबा गरीबनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना करते थे। कोई श्रद्धालु मंदिर में जाकर पूजा नहीं कर सकता था। अनलॉक शुरू होने के बाद करीब पौने तीन महीने पर सात जून को मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोला गया। इसके बाद लोग मंदिर में जाकर बाबा गरीबनाथ की पूजा-अर्चना करने लगे।

पहलेजा से आते जल लेकर बाबा को चढ़ाने

सावन के प्रत्येक सोमवार को पहलेजा घाट से हजारों कांवरिएं बाबा गरीबनाथ मंदिर जल चढ़ाने आते हैं। करीब 77 किमी की दूरी तय कर बाबा के दरबार में पहुंचकर उनका जलाभिषेक करते हैं। मंदिर के प्रशासक व मुख्य पुजारी पंडित विनय पाठक ने बताया कि कभी यह इलाका जंगल था। दो सौ वर्ष पहले इसकी सफाई की जा रही थी। जंगल में पीपल के सात पेड़ भी थे। छह के बाद मजदूरों ने सातवें पेड़ के पास खोदाई शुरू की। इस दौरान कुल्हाड़ी का वार एक पत्थर पर पड़ा। उस पत्थर से लाल द्रव का फव्वारा फूट पड़ा। खोदाई रोक दी गई और वहां मिले शिवलिंग को निकाला गया। कहा जाता है कि उक्त जमीन के मालिक ने सात धूर जमीन को घेरकर पूजा-पाठ आरंभ कराई। आज भी पीपल का पेड़ यहां है।

चार कट्ठे में बना है मंदिर

वर्ष 2006 में मंदिर का अधिग्रहण किया गया। बाबा गरीबनाथ न्यास समिति बनी। प्रसिद्धि के साथ मंदिर की समृद्धि भी बढ़ी। परिसर अब चार कट्ठे में विस्तार पा चुका है। वहीं बाबा गरीबनाथ न्यास समिति की सालाना आमदनी सवा करोड़ हो चुका है। हालांकि चालू वर्ष में लॉकडाउन के कारण इसमें कमी आई है।

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