पटना : डीजल के दाम में हुए इजाफे के बाद खेती किसानी पर बड़ा असर पढने वाला है. लागत बढ़ने से किसानों की आमदनी घट जाएगी. बताया जा रहा है कि इससे बिहार के किसानों को 500 करोड़ की चपत लग सकती है.
राज्य सरकार खेती के लिए 60 रुपए का अनुदान देती है, लेकिन यह अनुदान केवल सिंचाई के लिए ही दिया जाता है. किसान कटनी से लेकर दौनी तक के लिए डीजल मशील पर आश्रित रहते हैं.लिहाजा डीजल के दाम में इजाफा होने के बाद किसानों की लागत बढ़नी तय है. ऐसे में अब किसानों की आमदनी में भारी कमी आ सकती है.अगर सभी सेक्टर की बात करें तो किसानों को लगभग पांच सौ करोड़ रुपये केवल धान की खेती पर अतिरिक्त खर्च होंगे.

डीजल की कीमत बढ़ने के बाद किसानों को अगर दस रुपये प्रति लीटर भी अतिरिक्त देना पड़ा तो केवल सिंचाई पर बिहार के किसानों 300 रुपये प्रति एकड़ अधिक खर्च करना पड़ेगा. लगभग 35 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है. इस हिसाब से केवल धान की खेती पर पर किसानों को सिंचाई के लिए लगभग 260 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पडेंगे.यह खर्च पहले से हो रहे खर्च के अतिरिक्त होगा.
इसके साथ ही कटनी और दौनी के साथ बाजार तक पहुंचाने में ट्रैक्टर के किराया के खर्च में जो वृद्धि होगी वह अलग है.जानकारी के मुताबिक एक हार्वेस्टर एक घंटे का एक हजार रुपया लेता है अब यह बढ़कर 1300 रुपये प्रति घंटा हो गया है अगर इस अवधि में एक एकड़ जमीन की कटनी होती है तो तीन सौ रुपये अतिरिक्त देने होंगे. इस हिसाब से 35 लाख हेक्टेयर में लगभग 85 लाख घंटे लगेंगे और उसपर 255 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
Input: News4nation



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