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लद्दाख: पॉइंट 14 से चीनी सैनिकों के टेंट हटाने से इनकार पर शुरू हुई थी झ’ड़प, जानें गलवान घाटी में क्या-क्या हुआ…

नई दिल्ली. एलएसी पर भारत और चीन के बीच तनाव हिंसक रूप में बदल चुका है. इस हिंसक झड़प में दोनों ओर की सेनाओं को नुकसान हुआ है, गलवान नदी (Galwan River) पर जानलेवा भिड़ंत हुई, जिसमें 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू (Colonel Santosh Babu) और दो अन्य जवानों की जान चली गई. यह घटना तब हुई जब सेना (भारतीय) ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (People’s Liberation Army) के टेंट को हटाने के लिए मोर्चा खोल दिया. इस टेंट को पोजिशन कोड-पट्रोल पॉइंट 14 के पास लगाया गया था, जो इलाका वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) के भारतीय पक्ष के अंदर आता है.

लड़ाई (Fighting) कैसे शुरू हुई, इस पर कुछ जानकारी सामने आई है लेकिन घटनाओं से परिचित सरकारी सूत्रों ने बताया कि PLA के सैनिकों (PLA Soldiers) ने पॉइंट 14 के ऊपर ऊंची जमीन से पत्थर फेंककर भारतीय कार्रवाई (Indian action) का जवाब दिया और फिर लोहे की छड़ और क्लबों का उपयोग हमले के लिए किया.
पॉइंट 14, गलवान और श्योक नदियों के संगम के पास है. पिछले सप्ताह एक डिवीजन कमांडर-स्तरीय बैठक इसी स्थान पर हुई थी, जहां भारतीय सेना और पीएलए (PLA) ने सैनिकों को कम करने के लिए सहमति जताई थी. इस कदम को मई से शुरू हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा पर महीनों पुराने संकट के समाप्त होने की दिशा में पहले कदम के रूप में देखा गया था.

हाथापाई के दौरान भीषण लड़ाई रोकते हुए PLA सैनिकों ने बनाया निशाना
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि उन सटीक परिस्थितियों की जांच की जा रही है, जिसके अंतर्गत कर्नल बाबू की मौत हुई. उन्होंने कहा कि ऐसा समझ आता है कि हाथापाई के दौरान भीषण लड़ाई टालने की कोशिश करते हुए पीएलए (PLA) सैनिकों ने उन्हें निशाना बनाया.

स्थानीय पीएलए कमांडरों, सरकारी सूत्रों ने कहा, मंगलवार की सुबह लड़ाई को टालने के लिए एक बैठक बुलाई गई थी, जिससे स्थानीय स्तर की सैन्य वार्ता हो सके. यह मीटिंग इस रिपोर्ट को लिखने के समय तक चल ही रही है.

नई दिल्ली और बीजिंग ने लड़ाई पर अब तक नहीं दिया आधिकारिक बयान
एक सैन्य अधिकारी ने कहा, “हम अब तक जो भी जानते हैं, उससे यह लगता है कि चीन की इस कार्रवाई के पीछे कोई बड़ी योजना नहीं थी.” सबसे अधिक संभावित स्पष्टीकरण यह है कि उन्होंने हमसे उम्मीद नहीं की थी कि हम अपने मैदान पर डटे रहेंगे.”

नई दिल्ली और बीजिंग (Beijing) ने अब तक इस बात पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार किया कि है लड़ाई कैसे शुरू हुई.

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