ऑटो टिपर घोटाला में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से विशेष कोर्ट निगरानी में आ’रोप पत्र दाखिल होने के बाद महापौर सुरेश कुमार की मु’श्किलें बढ़ गई है। अगर आरो”प पत्र को संज्ञान के बाद विशेष कोर्ट में उनके व अन्य चार्जशीटेड आ’रोपितों के वि’रुद्ध आ’रोप तय हो जाता है तो सेशन-ट्रायल चलेगा। इस दौरान ब्यूरो की ओर से विशेष कोर्ट साक्ष्य पेश किए जाएंगे। आ’रोपित भी अपने बचाव में सफाई साक्ष्य पेश कर सकते हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद विशेष कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी।
आगे इस तरह चलेगी कानूनी का’र्रवाई
विशेष लोक अभियोजक निगरानी अरुण कुमार चौधरी ने बताया कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने महापौर सहित तीन के वि’रुद्ध विशेष कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। कोर्ट इस आरोप पत्र को संज्ञान में लेगी। इसके बाद तीनों आरो’पितों को विशेष कोर्ट में पेश होने के लिए सम्मन जारी होगा। विशेष कोर्ट में उन्हें आरो’प का सारांश पढ़कर सुनाया जाएगा। उनके खिला’फ आ’रोप तय किए जाएंगे। आरोप नकारने की’ स्थिति में तीनों के खि’लाफ सेशन- ट्र्रायल चलेगा। हालांकि इससे पहले आरो’पित आरोप मुक्ति की अर्जी कोर्ट में डाल सकते हैं। इस अर्जी की सुन’वाई व आदेश के बाद आगे की कानूनी का’र्रवाई की जाएगी।

मूल विभाग ने अब तक स्वीकृति नहीं दी
तत्कालीन नगर आयुक्त रमेश रंजन प्रसाद, तत्कालीन प्रभारी डॉ. रंगनाथ चौधरी, कार्यपालक अभियंता बिंदा सिंह, सहायक अभियंता महेंद्र सिंह, नंद किशोर ओझा, कनीय अभियंता मो.क्यामुद्दीन अंसारी के विरुद्ध उनकी सेवा के मूल विभाग के सक्षम पदाधिकारी ने अभियोजन चलाने की अब तक स्वीकृति नहीं दी है। ब्यूरो की ओर से कहा गया है कि एक आ’रोपित ऑटा टिपर आपूर्तिकर्ता मौर्या मोटर प्राइवेट लिमिटेड पटना के प्रोपराइटर लोक सेवक नहीं है। इसलिए इसके वि’रुद्ध अभियोजन स्वीकृति का आदेश लेना आवश्यक नहीं है।
हालांकि इस मामले में राजनीति तेज हो गई है। कई पार्षद मेयर से इस्तीफा मांग रहे हैं।



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