इस गर्मी शहरवासियों की प्यास नहीं बूझ पाएगी। निगम की जलापूर्ति सुविधा के लिए अब लंबे समय तक इंतजार करना पड़ेगा। लोगों की प्यास बुझाने के लिए निगम द्वारा 43 करोड़ की योजना की निविदा की गई थी। इसके तहत शहर के सभी वार्डो में पेयजल सुविधा से वंचित मोहल्लों में मिनी पंप एवं पाइप लाइन का विस्तार करना था।
18 वार्डो की निविदा को असफल घोषित किया
निविदा को तकनीकी स्वीकृति के लिए बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम के मुख्य अभियंता को भेजी गई थी। एक माह के बाद मुख्य अभियंता ने बुधवार को 18 वार्डो की निविदा को असफल घोषित कर दिया। पूर्व में वह चार वार्डो की योजना को असफल घोषित कर चुकी है। वहीं आठ वार्डो की योजना अभी तकनीकी स्वीकृति के लिए नहीं भेजी गई है। इस वार्ड एक, चार, 10, 22 एवं 39 को छोड़ शेष सभी वार्डो को अब योजना की जमीन पर उतरने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

पेयजल संकट झेल रहे लोगों की परे’शानी बढ़ेगी
जलसंकट से जूझ रहे लोगों की नाराजगी झेल रहे वार्ड पार्षदों में इससे आक्रोश है। उनका कहना है कि पूर्व में भी 98 करोड़ की जलापूर्ति योजना सरकारी खेल में फंसकर डूब चुकी है। एक बार फिर वही खेल शुरू हो गया है। सरकारी दांव-पेच में फंसाकर 43 करोड़ की योजना को विफल कर दिया जाएगा।
महापौर सुरेश कुमार ने कहा कि योजना के लंबित होने से पेयजल संकट झेल रहे लोगों को परेशानी होगी। पहले ही निविदा की प्रक्रिया में काफी समय लग चुका है। फिर से निविदा की प्रक्रिया में समय लगेगा। सरकार योजना को तेजी से पूरा कराने में मदद करे। जिससे समय से इन योजनाओं को पूरा किया जा सके। उससे भी बड़ी चीज यह कि लोगों को पानी की समस्या से निजात मिल सके। स्मार्ट सिटी की दिशा में काम कर सकें।



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