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नीतीश कुमार की बातों पर यकीन करेंगे तो भूखे म’र जायेंगे इसलिए वापस लौट रहे हैं, पढ़िए बिहार के प्रवासी मजदूरों की व्यथा

RANCHI : बुधवार की शाम गढ़वा जिले में झारखंड और छत्तीसगढ के बार्डर पर मजदूरों से भरी बस रूकती है. कोरोना को लेकर सतर्क पुलिस बस में सवार लोगों से पूछताछ करती है. बस में बैठे लोग बताते हैं कि वे बिहार के मुजफ्फरपुर से छत्तीसगढ के रायपुर स्टील प्लांट में काम करने वापस लौट रहे हैं. बार्डर पर तैनात छत्तीसगढ़ के पुलिसकर्मियों को थोड़ी हैरानी होती है, आखिरकार कोराना संकट के इस दौर में लोग वापस क्यों लौट रहे हैं. लेकिन शायद उपर से भी मजदूरों के लौटने की खबर थी लिहाजा उन्हें वापस छत्तीसगढ़ में लौटने की छूट दे दी जाती है. पिछले चार दिनों में बिहार के मजदूरों से भरी कई बसें छत्तीसगढ आ चुकी हैं.


संवाददाता ने मजदूरों से बात की तो सीधा जवाब मिला. अगर काम न मिले, घर में खाने का कुछ न हो, बच्चों संग परिवार भूखे सोता हो तो… मजदूर कुछ देर के लिए चुप हो गये. फिर साहस बटोरा और बोलना शुरू किया….नीतीश बाबू के वादे पर बहुत भरोसा किया था. लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ. अपने घर में खाने के लिए अनाज जुटाना असंभव हो गया. अब बाहर जाकर काम करने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं बचा है. बिहार में रहेंगे तो भूखे मरेंगे.  बाहर निकलें तो कोरोना का खतरा. लेकिन भूखे मरने से बेहतर है कोरोना का खतरा उठाना. कोरोना संक्रमण का खतरा उठाकर परिवार चलाने का विकल्प ही हमलोगों ने चुना है. अब जो होगा सो होगा. बिहार के मुजफ्फरपुर से छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित स्टील प्लांट लौट रहे मजदूरों ने अपनी मजबूरी बतायी.  बुधवार को आधा दर्जन बसों से मजदूर काम पर लौट गए.

नीतीश के वादे पर भरोरा कर फंस गये

छत्तीसगढ लौट रहे मजदूरों ने बिहार सरकार की कहानी सुनायी.मुजफ्फरपुर के देवेंद्र रजक ने कहा नीतीश बाबू कह रहे थे कि बिहार लौटने वाले सब मजदूर को काम देंगे. हमलोग भरोसा करके चले आये. घर लौट कर पता चला कि खाना नहीं जुटेगा. कोई रास्ता नहीं बचा इसलिए वापस लौट रहे हैं.

ये वही मजदूर हैं जो लॉकडाउन के दौरान जान बचाने के लिए पैदल घर भागकर आए थे, अब भूख से जान बचाने के लिए संक्रमण के खतरे के दौरान ही काम पर जा रहे हैं. मजदूरों ने बताया कि महाराष्ट्र, पुणे, रायगढ़, दिल्ली से पैदल तो कभी ट्रक पर सवार होकर लौटे थे. गांव घर में कोई काम नहीं मिला. सरकार कोई रोजगार नहीं दे रही है. सिर्फ जुबानी बात हो रही है. थक हारकर मजदूर वहीं लौट रहे हैं, जहां से संक्रमण के डर से जान बचाकर भागे थे. मुजफ्फरपुर सहित बिहार के अन्य हिस्सों से आधा दर्जन बसों में करीब 200 मजदूर बगैर रोक-टोक छत्तीसगढ लौटे हैं. उनमें 100 से अधिक की संख्या में मजदूर छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित स्टील प्लांट में काम करने लौटे हैं.

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