एईएस के आपातकाल पर एम्बुलेंस टेक्नीशियन के चार दिवसीय प्रशिक्षण का समापन
प्रशिक्षण में आपातकाल से निपटने के बताए गये तरीके
एम्बुलेंस में प्राथमिक उपचार के बताए गये तरीके
सीतामढ़ी 5 जून
एईएस / जेई के दौरान अक्सर देखा जाता है कि मरीज का ग्लूकोज लेवल कम जाता है। ऐसा इसलिए भी होता है क्योकि रात में बच्चे भूखे सो जाते हैं । ऐसे में उनके दिमाग में ग्लूकोज की कमी हो जाती है। जिससे उसे मिर्गी, बुखार जैसे लक्षण आने लगते हैं। इसमें ग्लूकोज का लेवल इतना कम होता है कि बच्चे की जान पर आ जाती है। ये बातें जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एसके चौधरी ने कही। मौका था शुक्रवार को एईएस पर चौथे और अंतिम दिन इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन के प्रशिक्षण का । एसीएमओ ने कहा कि इस तरह के मरीज जब अस्पताल में आते हैं तो उनका तत्काल ग्लूकोज लेवल माप कर उसका स्लाइन चढ़ाया जाता है। उसके बाद प्राथमिक उपचार कर के ही रेफरल अस्पताल में भेजा जाता है। यहीं पर इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन अपनी भूमिका निभाते हैं। यह जिस एम्बुलेंस में होते हैं वह अत्याधनिक लाइफ सर्पोटिंग सिस्टम मशीनों से लैश रहता है।

ऑक्सीजन सिलेंटर रहता है। लगभग 40 तरह की दवाएं होती हैं। मरीज को स्लाइन लगा रहता है। ऐसे में कोई प्रशिक्षित पारामेडिकल स्टॉफ ही इन सबको संभाल सकता है। यह प्रशिक्षण इन्हीं चीजों के क्षमता को बढ़ाने के लिए दिया जाता है। ताकि पारामेडिकल स्टॉफ मरीजों को अस्पताल के द्वारा छोड़े गये हालत में ही रेफरल अस्पताल तक ले जाए। चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज आखिरी दिन है। एसीएमओ ने कहा कि यह प्रशिक्षण प्रधान सचिव के निर्देश पर एईएस प्रभावित क्षेत्र के एबुंलेंस मेडिकल टेक्नीशियन के क्षमता को बढ़ाने के लिए है। जिले में जिस भी प्रखंड में एम्बुलेंस की समस्या या दिक्कत है , वहां उस कमी को पूरा किया जा रहा है। साथ ही अभिभावको से आग्रह है कि अगर आपके बच्चे में एईएस के लक्षण दिखाई दे तो उसे तुरंत ही नजदीकी पीएचसी पर लेकर जाएं। एक दिवसिय इस प्रशिक्षण में सीतामढ़ी जिले के ईएमटी को यह प्रशिक्षण दिया गया। इसके पहले भी मुजफ्फरपुर में आउटरीच की मेंटर्स को एईएस पर प्रशिक्षण दिया गया था।
यह प्रशिक्षण केयर के डॉ मेंहदी हसन ने दिया। उन्होंने ईएमटी को इमरजेंसी में निपटने के लिए एहतियात और जरुरी प्रशिक्षण प्रदान किया। जिसमें सोडियम की कमी को तुरंत पूरा करना, लाइफ सर्पोटिंग सिस्टम सहित अन्य जानकारियां थी।

अभी फैलायी जा रही है जागरुकता
डॉ चौधरी ने कहा कि अभी एईएस प्रभावित क्षेत्र में जागरुकता का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसमें दिवाल लेखन, सामुदायिक बैठक, आशा और एएनएम द्वारा जागरुकता भी फैलाया जा रहा है। वहीं पोषक क्षे़त्रों के बच्चों को दूध भी उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं आरोग्य दिवस के मौके पर सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सप्ताह के दो दिन जेई के टीके भी लगाये जा रहे हैं।
इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन निभाते हैं अहम भूमिका

एईएस में मरीज की जान बचाने के लिए शुरुआती दो से चार घंटे महत्वपूर्ण होते हैं। ई एम टी मेडिकल मुद्दों, दर्दनाक चोटों और दुर्घटना के दृश्यों के बारे में आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित हैं।
कार्यक्रम में एसीएमओ डॉ एसके चौधरी, डीपीएम असीत रंजन, एसीओ रवि रंजन, सीटीई नीलकमल, संगीता यादव, शिवानी मलिक, सीमा कुमारी, पुष्पमणि सहित सभी प्रखंडों से इमरजेंसी मेडिकल टेकिनीशियन मौजूद थे।




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