SITAMARHI : आत्मनिर्भर बने…. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशवासियो को कही गई इस बात का गहरा प्रभाव बिहार के सीतामढ़ी जिले में देखने को मिल रहा है. जहां सीतामढ़ी की एक महिला लॉकडाउन के दौरान अपने बच्चों के पालन पोषण के लिए सामाजिक बंधनो को तोड़, लोक लाज को छोड़कर हाथ में कैंची और अस्तूरा थाम लिया है. पुरुष प्रधान समाज में किसी महिला के पुरुष को हजामत बनाने की बात हर किसी को थोड़ी लोक लाज और शर्मिंदगी भरी लगे.
लेकिन सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी प्रखंड के बसौल गांव की सुखचैन देवी ने यह काम बखूबी करना शुरू कर दिया है. आज इस काम को सुखचैन देवी गर्व से कर रही है और अपने बच्चों को पाल रही है. सुखचैन देवी के इन हौसले को सब सलाम कर रहे है और आज वो पूरे प्रदेश में लेडीज बार्बर के रूप में विख्यात हो गई है. उनके इस कार्य मे गाँव के लोगो का भी समर्थन है.
सुखचैन देवी के पति लॉकडाउन के कारण चेन्नई में फंसे है. ऐसे में सुखचैन के सामने अपने बच्चों के भरण-पोषण की समस्या आ गई थी. बच्चों को भूख से तड़पता देख सुखचैन देवी ने सामाजिक सीमाओं को लांघ कर हाथ में अस्तूरा और कैंची थाम लिया और आज आत्मनिर्भर बन अपने बच्चों का पेट पाल रही है. सुखचैन गाँव में लोगों के घरों में जा कर हजामत (बाल और दाढ़ी बना रही है.

सुखचैन देवी ने बताया कि वह पहले से हजामत करने का कला जानती थी. कभी उसने इस काम को नहीं किया था. उसके पति रमेश ठाकूर पंजाब में रहकर बिजली मिस्त्री का काम करते थे और ये यहां गांव में परिवार के साथ रहकर बच्चों को पालती थी. लेकिन कोरोना संकट के इस काल में उसके पति की नौकरी छूट गई और वह बेरोजगार हो गया. पति पंजाब में ही फंस गए और यहां घर में बच्चों के खाने के लिए भी कुछ नहीं रहा. अभाव के कारण सुखचैन देवी ने अपने परिवार का जिम्मा खुद उठाने की ठानी और सामाजिक ताने-बाने को ताक पर रखकर हाथ में कैंची-अस्तूरा थाम लिया और घर-घर जाकर पुरुषों के बाल और दाढ़ी बनाने लगी. इस कला की बदौलत वह अपने परिवार और बच्चों को पाल रही है. लोग अब उसके हौसले को सलाम कर रहे हैं.



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