ग्रामीण क्षेत्रों के 1123 निजी चिकित्सा कार्य में लगे लोग हुए चमकी पर जागरुक
- जल्द पहचान में आएगी बीमा’री
- तत्परता से अस्पताल पहुंचाने में मिलेगी सहायता
मुजफ्फरपुर । 8 मई
चमकी की पहचान लक्षणों के आधार पर कर उसे जल्द पहचान मिल सके, इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 1123 निजी चिकित्सकों को चार चरणों में चमकी बुखार के प्रति जागरुक किया गया। प्रायः देखने मे यह आ रहा था कि बच्चे की तबियत खराब होने पर लोग गांव के चिकित्सक के चक्कर में अस्पताल लाने में काफी देर कर रहे थे। जबकि चमकी में जान बचाने के लिए सबसे जरुरी है कि उसे दो घंटे के अंदर ही अस्पताल लाया जाय। इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए जिलाधिकारी के तरफ से यह आदेश जारी किया गया था कि अब गांव के चिकित्सकों को भी चमकी पर जागरुक किया जाय।

जिससे उनके पास आये इस तरह के मरीजों की पहचान कर उसे जल्द से जल्द अस्पताल लाया जा सके। इस जागरुकता अभियान को प्रभावी और सफल बनाने के लिए प्रत्येक प्रखंड में वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा प्रखंड के निजी चिकित्सकों को चिन्हित कर उन्हें चमकी के बारे में जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि अगर उनके पास कोई भी मरीज आता है तो वह उसका ईलाज न कर तुरंत ही अस्पताल जाने की सलाह देगें। उन्हें प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि अगर बच्चे को बुखार हो या उसके साथ चमकी हो तो वह चमकी बुखार के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा अगर बच्चे को सिर्फ चमकी हो बुखार न भी हो तो भी उसे तुरंत ही नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया जाय। एईएस के मरीजों के लिए प्रत्येक प्रखंडों में एम्बुलेंस के साथ और भी वाहनों को टैग किया गया हैं।
कुल 1123 निजी चिकित्सक हुए जागरुक
कुल चार चरणों में एईएस के प्रति जागरुकता कार्यक्रम का संचालन किया गया। जिसमें गायघाट में 90, मोतीपुर 80, मीनापुर 55, कांटी में 66, कटरा 97, मुसहरी 78, बोचहां 28, औराई 97 मड़वन 63, साहेबगंज 39, पारु 106, सरैया 65, बांद्रा 45, मुसहरी 72, मुरौल 47 एवं सकरा में 95 लोग उपस्थित रहे।

चमकी बुखार के निम्न लक्षण देखे गए हैं।
- मिर्गी जैसे झटके आना (जिसकी वजह से ही इसका नाम चमकी बुखार पड़ा)
- बेहोशी आना
- सिर में लगातार हल्का या तेज दर्द
- अचानक बुखार आना
- पूरे शरीर में दर्द होना
- जी मिचलाना और उल्टी होना
- बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस होना और नींद आना
- दिमाग का ठीक से काम न करना और उल्टी-सीधी बातें करना
- पीठ में तेज दर्द और कमजोरी
- चलने में परेशानी होना या लकवा जैसे लक्षणों का प्रकट होना।
ऐसे करें बचाव
- बच्चों को रात में अच्छी तरह से खाना खिलाकर सुलाएं। खाना पौष्टिक होना चाहिए।
- बच्चों को खाली पेट लीची न खाने दें। अधपकी लीची का सेवन कदापि न करने दें।
- बच्चे को रात के खाने में मीठा जरुर दें
- बच्चों को धूप में न निकलने दें
- बच्चे को कभी भी रात में भूखे पेट न सोने दें



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