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AES प्रभावित इलाकों में बच्चों को भोजन के साथ मिलेगा दूध, CM नीतीश ने अधिकारियों को दिए कई बड़े निर्देश…

कोरोना सं’कट की महामा’री के बीच चमकी बु’खार को लेकर भी नीतीश सरकार ने कमर कसनी शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना सं’दिग्धों की पहचान के लिए पल्स पोलियाे अभियान की तर्ज पर घर-घर जाकर की जा रही स्क्रीनिंग के दौरान एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के संबंध में भी जानकारी जुटाने का निर्देश अधिकारियों को दिए.

नेक संवाद में वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीएम नीतीश ने स्वास्थ्य विभाग और चमकी बु’खार के प्रभा’वित इ’लाकों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक की. इस बैठक में एईएस और जेई की रोकथाम को लेकर किये जा रहे कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में निर्देश देते हुए कहा कि कोराना संक्रमण को लेकर घर-घर जाकर चलाये जा रहे सर्वेक्षण कार्य में एईएस एवं जेई के संबंध में भी जानकारी ली जाये. इसके साथ ही सीएम नितीश ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन को यह निर्देश दिया कि AES प्रभावित मुजफ्फरपुर के 5 प्रखंडों में मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को 200 ग्राम दूध का पाउडर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. बच्चों को अतिरिक्त पोषण के लिए पोषक आहार उपलब्ध कराया जाये. उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर के पांच प्रखडों में किराये के मकान में चल रहे 303 आंगनबाड़ी केन्द्र के लिये जल्द से जल्द भवन निर्माण कार्य शुरू कराया जाये.

सीएम नीतीश ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जेई का पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित कराया जाये. वाहनों की गाॅव वार टैगिंग करें और अस्पताल पहुॅचने पर उनके तत्काल भुगतान की व्यवस्था की जाय ताकि एईएस एवं जेई पीड़ित मरीजों को ससमय अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई न हो. उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपस में समन्वय स्थापित कर एईएस एवं जेई की रोकथाम के लिये काम करें.




मुख्यमंत्री ने कहा कि आशा एवं आंगनबाड़ी कर्मी घर-घर जाकर लोगों को यह जरूर बतायें कि एईएस के लक्षण दिखने पर बच्चों को तुरंत अस्पताल ले जाएं. बीमारी के संबंध में लोगों को जागरूक करना नितान्त आवश्यक है.  आशा और आंगनबाड़ी कर्मी बच्चों के माता-पिता को बतायें कि बच्चों को रात में सोने से पहले खाना जरूर खिलाना है. उन्होंने कहा कि एएनएम, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदीयां, स्थानीय जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी सेविका आपस में टीम बनाकर घर-घर जाकर अभिभावकों को इस बीमारी के संबंध में जानकारी दें और उन्हें सचेत करें.

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