पटना. नीट पेपर लीक कांड मामले में 18-19 जून को आर्थिक अपराध इकाई जिन 9 परीक्षार्थियों से पूछताछ करेगी उसके लिए प्रश्नावली तैयार कर ली गई है. परीक्षार्थियों के अभिभावकों से इस बात की जानकारी ली जाएगी की क्या पहले से ही उनसे किसी तरह का कोई ब्लैंक चेक लिया गया है? आर्थिक अपराध इकाई की एसआईटी की पूरी टीम इस पूछताछ में शामिल रहेगी. बता दें, ये वही 9 परीक्षार्थी हैं जिनका रोल नंबर सॉल्वर गैंग के गिरफ्तार मेंबर्स के पास से मिला है.

नीट पेपर लीक कांड की घटना के बाद देश भर में इसकी चर्चा हो रही है. दूसरी ओर यह जानकारी सामने आई है कि मूल प्रश्न पत्र की प्रति उपलब्ध न होने की वजह से नीट पेपर लीक मामले की जांच में बाधा आ रही है. जानकारी के अनुसार, नीट के मूल प्रश्न प्राप्त करने के लिए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को अब तक तीन रिमाइंडर भेजे है. लेकिन, एनटीए ने इसके बावजूद प्रश्न पत्र की प्रति उपलब्ध इओयू को उपलब्ध नहीं कराई गई है जिससे जांच प्रभावित हो रही है. इस मामले की जांच कर रही इओयू के अधिकारी भी इसे लेकर हैरान हैं.
सॉल्वर गैंग को क्यों पड़ती है बिहारी छात्रों की जरूरत?
जानकारी के अनुसार और जांच प्रक्रिया में सहयोग नही किए जाने के बाद नए सिरे से पेपर लीक के मामले को खंगाला जा रहा है. गुरुवार को ही अधिकारियों ने रिमांडर भेजे जाने की बात कही थी. लेकिन अबतक प्रश्न पत्र की प्रति नहीं मिल पाना कई सवाल खड़े कर रहा है. जब भी कहीं पेपर लीक होता है तो कहीं ना कहीं से उसके तार बिहार आकर जरूर जुड़ते हैं. सवाल यही उठता है कि आखिर सॉल्वर गैंग को बिहारी छात्रों की जरूरत ही क्यों पड़ती है. इसका सीधा सा जवाब सिर्फ एक शब्द में है और वह है टैलेंट यानी प्रतिभा. आप किसी भी परीक्षा को देख ले उसमें बिहारी प्रतिभाओं ने हमेशा अपना लोहा बनवाया है. लेकिन कई बार यह टैलेंट पटना की सड़कों पर चाय बेचते, मुजफ्फरपुर की सड़कों पर लिट्टी बेचते नजर आता है. कई बार प्रतिभाशाली छात्र कट ऑफ न आ पाने की वजह से उस मुकाम को हासिल नहीं कर पाते जिसका वह सपना देखते हैं.



एक वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक अगर सॉल्वर गैंग के चंगुल में फंसे सॉल्वर छात्रों को देखा जाए. तो उन में ज्यादातर अन रिजर्व कैटेगरी के छात्र होते हैं. यह वह छात्र होते हैं जिनमें प्रतिभा तो होती है लेकिन हाई कट ऑफ के चलते वह प्रतियोगी परीक्षाओं में पीछे रह जाते हैं. ऐसे छात्रों पर सॉल्वर गैंग की गिद्ध दृष्टि पड़ ही जाती है. आर्थिक तंगी झेल रहे छात्र भी मोटी रकम के झांसे में आकर सॉल्वर गैंग के हाथों का मोहरा बन जाते हैं.



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