नरेंद्र मोदी के तीसरी बार पीएम बनने की राह में रुकावट आने का जो ख्वाब विपक्षी ‘इंडी’ गठबंधन के नेता देख रहे थे, वो मंसूबे हवा में ही रह गये. खुद बिहार के मुख्यमंत्री और एनडीए के घटक दल, जेडीयू के नेता नीतीश कुमार ने मोदी से जल्दी सरकार बनाने की अपील कर दी. इसके साथ ही बीजेपी के सभी सहयोगी दलों के नेताओं ने मोदी को एनडीए का नेता चुने जाने के पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए उनके तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का रास्ता औपचारिक तौर पर भी साफ कर दिया.
आजादी के बाद लगातार तीन बार प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले भी वो तीसरे ही व्यक्ति होंगे. इससे पहले ये रिकॉर्ड सिर्फ नेहरू और इंदिरा गांधी के खाते में रहा है. इंदिरा गांधी ने लालबहादुर शास्त्री के देहांत के बाद पहली बार 1966 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उसके बाद 1967 के लोकसभा चुनावों के बाद और फिर मार्च 1971 में हुए लोकसभा चुनावों के बाद.
जहां तक संसदीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड की बात है, मोदी कई मामलों में विशिष्ट हैं. वो बिना विधानसभा का कोई चुनाव पहले लड़े हुए सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे. सात अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले मोदी पौने तेरह साल तक लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, और वहां से सीधे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे. 1960 में गुजरात की स्थापना के बाद से वो एक मात्र मुख्यमंत्री रहे, जिसने लगातार चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
3 विधानसभा और 3 लोकसभा चुनाव जिताने वाले एकमात्र नेता
गुजरात में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले मोदी ने अपनी अगुवाई में लगातार तीन विधानसभा चुनाव बीजेपी को जिताने का रिकॉर्ड भी बनाया. ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ. गुजरात में इस तरह का अनूठा रिकॉर्ड बनाने के बाद देश के प्रधानमंत्री बनने वाले मोदी ने लोकसभा के भी लगातार तीन चुनाव अपनी अगुवाई में एनडीए गठबंधन और अपनी पार्टी बीजेपी को जिताए हैं. ऐसा करने वाले भी वो एक मात्र गैर-कांग्रेसी नेता हैं.
कांग्रेस में ये कीर्तिमान सिर्फ नेहरू के पास रहा है, वो भी उस कांग्रेस के नेता के तौर पर, जिस कांग्रेस को आजादी बाद के पहले तीन चुनावों में उस तरह से विपक्ष की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा था, जैसा आज के दौर में है.
















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