पीएम नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल के पास सूर्य देव को अर्घ्य दिया और उसके बाद दो दिन की ध्यान साधना शुरू कर दी. हिंदू धर्म में सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है, जिसमें जल से अर्घ्य देना महत्वपूर्ण माना जाता है. छठ पर्व में उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इसके अलावा आप ने अपने आस-पास भी किस न किसी को सूर्य देव को अर्घ्य देते हुए देखा होगा. आखिर सूर्य देव को अर्घ्य देने से क्या लाभ होता है?
सूर्य को क्यों देते हैं अर्घ्य?
श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी बताते हैं कि सनातन धर्म में सूर्य देव को साक्षात् देव माना जाता है, वहीं ज्योतिषशास्त्र में सूर्य ग्रहों के राजा हैं. सूर्य को दुनिया की आत्मा कहा गया है. उसके बिना जीवन संभव नहीं माना जाता है. इस समय ज्येष्ठ माह में सूर्य रवि नाम के और रोहिणी नक्षत्र में हैं. जिन लोगों की कुंडली में सूर्य प्रभावी यानी मजबूत स्थिति में होता है, वे लोग राजा के समान जीवन व्यतीत करते हैं या बहुत बड़े पद पर होते हैं. जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर होता है या सूर्य दोष होता है, उन पर उसका अशुभ प्रभाव पड़ता है. उस दोष को दूर करने और सूर्य के शुभ प्रभाव की प्राप्ति के लिए अर्घ्य दिया जाता है.
नौतपा में सूर्य अर्घ्य सबसे उत्तम
ज्योतिषाचार्य डॉ. तिवारी कहते हैं कि इस समय नौतपा चल रहा है, इस दौरान सूर्य देव अपने उच्च स्तर होते हैं. यदि आप नौतपा में प्रात:काल के समय सूय देव को अर्घ्य देते हैं तो वह ज्यादा प्रभावी और फलदायी माना जाता है. इससे आपको करियर में तरक्की मिलेगी. आप जिस भी क्षेत्र में होंगे, उसमें शीर्ष पर पहुंचने के योग बनेंगे.
सूर्य का राजनीति से है बड़ा संबंध
जो लोग राजनीति से जुड़े होते हैं, उनके लिए सूर्य का बड़ा महत्व हैं क्योंकि सूर्य राजा हैं. राजनेताओं के लिए सूर्य का मजबूत होना बहुत जरूरी है. यदि सूर्य मजबूत होगा, तभी आपको उच्च पद और यश की प्राप्ति हो पाएगी. आपका मनोबल, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति चट्टान की तरह मजबूत होगा. इस वजह से ही आप बड़े फैसले कर पाने में सक्ष्म होंगे. कठिन से कठिन परिस्थितियों पर भी विजय हासिल करने में सफल हो पाएंगे.















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