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घर – घर जाकर खिलाई जा रही है फाइलेरियारोधी दवा

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जिले में जीविका व आशा दीदी ग्रामीणों को जागरूक करते हुए घर-घर जाकर सर्वजन दवा सेवन करा रहीं हैं। वे लोग इसके महत्व को भी समझा रहीं हैं, ताकि सभी लोग सर्वजन दवा सेवन कर फाइलेरिया जैसे विकलांग कर देने वाले रोग से सुरक्षित ऱह सकें। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा बैरिया प्रखंड, पंचायत लौकरिया, धनवतीया में फाईलेरिया दवा खाने से इनकार करने वाले लोगों को स्वास्थ्य कर्मी व आशा द्वारा समझाकर एलबेंडाजोल व डीइसी की दवा खिलवाई गई। लोगों को बताया गया कि जिन लोगों के शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद होते हैं उन्हीं लोगों में हल्के-फुल्के साइड इफेक्ट देखे जाते हैं, जिनमें लोगों को बुखार, सिर दर्द, पेट दर्द, उल्टी जैसे लक्षण कुछ समय तक होते है जो बाद में स्वतः ठीक हो जाते हैं। जिला आशा समन्वयक राजेश कुमार ने बताया कि दवा का सेवन करना बहुत जरूरी है, सर्वजन दवा का सेवन करने पर ही (हाथी पांव ) फाइलेरिया से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आशा दीदी खुद दवा खाने के साथ अपने क्षेत्र में लोगों को दवा का सेवन कराने में मदद कर रही हैं।

  • मच्छर के काटने से होता है फाइलेरिया :
    सीएस डॉ श्रीकांत दुबे ने बताया कि फाइलेरिया को आम भाषा में हाथीपांव भी कहा जाता है। यह बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, दीर्घकालिक दिव्यांगता की एक बड़ी वजह फाइलेरिया है। यह एक ऐसी घातक बीमारी है जो शरीर को धीरे-धीरे खराब करती है। डीभीडीसीओ डॉ हरेंद्र कुमार ने कहा कि दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है। यह दवा दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को नहीं खानी है। उन्होंने बताया कि दवा सेवन के बाद किसी भी प्रकार के साइड इफ़ेक्ट होने पर सुरक्षा और उपचार हेतु जिला एवं प्रखंड स्तर पर रैपिड रेस्पोंस टीम का गठन भी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम व सहयोगी संस्थाओं द्वारा लगातार निरीक्षण भी किया जा रहा है।

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