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शनिवार के ये 5 उपाय आपको बना सकते हैं करोड़पति, अभी जानें…

Shaniwar ke Upay: सभी देवों में शनि देव को सबसे निष्ठुर और कठोर माना जाता है लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. पुराणों के मुताबिक शनि देव न्याय के देवता हैं. वे जीवों के कर्मों के अनुसार उन्हें उचित प्रतिफल देते हैं. अगर कोई जीव गलत काम करता है तो वे उसे कठोर दंड देते हैं. वहीं अच्छा काम करने और दूसरों पर दया करने वालों पर वे खूब कृपा बरसाते हैं. शनि देव की इसी महिमा की वजह से हर मनुष्य पूजा-पाठ के विभिन्न तरीकों से उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं. आज हम आपको शनि देव से जुड़े 5 विशेष उपाय बताते हैं. अगर आप इन 5 उपायों पर अमल कर लेते हैं तो आपकी जिंदगी का बेड़ापार होने से कोई रोक नहीं सकेगा. आइए जानते हैं कि वे टिप्स क्या हैं. 

शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय (Shaniwar ke Upay)

शनिवार को सुबह कर लें ये काम

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार (Shaniwar ke Upay) को स्नानादि के बाद विधि विधान से शनि देव की आराधना करनी चाहिए और शनि चालीसा का पाठ पढ़ना चाहिए. इस दिन सुंदरकांड का पाठ भी जरूर करना चाहिए. ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं.

शनिवार (Shaniwar ke Upay) को कौवों को रोटी खिलानी चाहिए. ऐसा करने से पितर संतुष्ट होते हैं और उनका आशीर्वाद बरसता है. इसके साथ ही शनिवार को काले जूते-चप्पल, काली छतरी या काली उड़द की दाल को दान भी करना चाहिए. ये सब दान पुण्यलाभ देते हैं. 

शाम को ये काम करना न भूलें

शनिवार (Shaniwar ke Upay) की शाम को अपने घर में लोबान जलाएं. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है. इसके साथ ही गाय को रोटी खिलाएं. इसके बाद पीपल के पेड़ के नीचे काले तिल डालकर सरसों के तेल का दीया जलाएं. इस दिन मंदिर में जाकर हनुमान जी की पूजा भी करें. 

मान्यता है कि शनिदेव (Shani Dev) का प्रिय भोजन खिचड़ी है. इसलिए शनिवार को उनकी प्रतिमा के सामने खिचड़ी जरूर अर्पित करनी चाहिए. इसके साथ ही इस दिन खिचड़ी के प्रसाद का वितरण करना भी कुंडली में शनि की स्थिति को मजबूत करता है. ऐसा करने से शनि प्रसन्न होते हैं. 

मंदिर में इस बात का रखें विशेष ध्यान

शास्त्रों के अनुसार महिला- पुरुष दोनों समान रूप से शनि की पूजा- अर्चना कर सकते हैं. दोनों के बीच कोई भेद नहीं है. हालांकि शनि (Shani Dev) की पूजा के दौरान दोनों को एक खास बात का ध्यान रखना होगा कि वे शनि देव को स्पर्श नहीं करें. इस तरह का अधिकार केवल मंदिर के पुजारी को है और किसी को नहीं. 

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