केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन को देखते हुए मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी बढ़ा दी है। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय ने कहा है कि मजदूरों के वेतन में 20 रुपये की औसत वृद्धि की गई है। लॉकडाउन में मजदूरों की हालत दयनीय होने के कारण सरकार ने यह कदम उठाया है।
कोरोना वायरस महामारी के कारण पहले चरण के लॉकडाउन में मनरेगा के मजदूरों को काम करने की इजाजत नहीं दी गई थी। हालांकि लॉकडाउन के दूसरे चरण में उन्हें कुछ शर्तों के साथ काम करने की इजाजत दी गई है। उन्हें न सिर्फ शारीरिक दुरी बल्कि स्वच्छता के नियमों का भी पालन करना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को 14 अप्रैल तक देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी, जिसे 14 अप्रैल को बढ़ाकर 3 मई कर दिया गया है।
मनरेगा कार्यों को गति देने संबंधी पत्र में कार्य स्थल सोशल डिस्टेंसिंग,श्रामिकों को मास्क एवं फेस कवर पहना अनिवार्य कराने के निर्देश दिए हैं। यही नहीं श्रमिकों को हाथ धोने एवं स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराने को कहा है।
गौरतलब है कि कोरोना के लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को भी बड़ी राहत देते हुए सरकार ने कहा है कि वे जहां भी हैं, वहां मजदूरी कर सकते हैं। हालांकि उन्हें अपने गृह राज्य जाने या फिर अन्य किसी राज्य में मूवमेंट करने की इजाजत नहीं होगी। केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि रिलीफ कैंपों में फंसे मजदूर जहां हैं, उन्हें वहीं काम मिल सकता है। वे उस राज्य में मूवमेंट कर सकते हैं, जहां बसे हैं। लेकिन यदि वे दूसरे राज्य के रहने वाले हैं तो उन्हें अपने घर जाने की अभी अनुमति नहीं दी जाएगी। गृह मंत्रालय की ओर से मजदूरों के लिए जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम फॉर मूवमेंट ऑफ स्ट्रेंडड लेबर के तहत यह छूट दी गई है।



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