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फिर बढ़ सकती है लालू यादव की मुश्किलें, जानें CBI ने क्यों निकाला देवघर ट्रेजरी मामले का जिन्न?

रांची. 2024 में I.N.D.I.A. गठबंधन की राजनीति का ताना-बाना बुन रहे राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद की मुसीबतें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. झारखंड हाईकोर्ट में देवघर ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले में सजायाफ्ता हो चुके लालू प्रसाद की सजा बढ़ाने की मांग को लेकर सुनवाई चल रही है. सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई और प्रतिवादियों का पक्ष सुना, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए दिसंबर के दूसरे हफ्ते की तारीख निर्धारित की गई है.

आपको बता दें कि चारा घोटाले के सभी मामलों में लालू प्रसाद को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है. लेकिन, अब एक बार फिर देवघर ट्रेजरी का मामला जिन्न बनकर लालू प्रसाद के पीछे घूमता नजर आ रहा है. देवघर ट्रेजरी मामले में लालू प्रसाद की सजा बढ़ाने की मांग को लेकर सीबीआई की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.

सीबीआई की ओर से इस याचिका में कहा गया है कि लालू प्रसाद को देवघर मामले में सिर्फ साढ़े 3 साल की सजा दी गई है. जबकि उन्हें अधिकतम 7 साल की सजा दी जानी चाहिए थी. आपको बता दें कि देवघर मामले में लालू प्रसाद बेक जुलियस समेत कुल छह लोगों को 3 साल से 6 साल तक की सजा सुनाई गई है. सीबीआई की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि लालू प्रसाद की संलिप्तता को देखते हुए उन्हें अधिकतम 7 साल की सजा मिलनी चाहिए.

दरअसल देवघर ट्रेजरी मामले में दो सजायाफ्ता फूलचंद सिंह और आरके राणा गुजर चुके हैं. एक हस्तक्षेप याचिका दायर कर कोर्ट को दोनों सजायाफ्ता के गुजर जाने की जानकारी दी गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले से दोनों का नाम हटाने का आदेश दिया था. आपको बता दें कि चारा घोटाले के देवघर, डोरंडा, दुमका और देवघर ट्रेजरी से अवैध निकासी मामले में लालू प्रसाद को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है. लालू फिलहाल जमानत पर बाहर हैं और राजनीति में सक्रिय हैं. ऐसे में एक बार फिर देवघर ट्रेजरी से जुड़े मामले में सजा बढ़ाने की मांग को लेकर राजद सुप्रीमो की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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