हेलो… पापा मैं अंशु। पापा मैं जिंदा हूं। मैं मरी नहीं, आपने जिसकी डेड बॉडी जलाई, वो मैं नहीं थी पापा। दरअसल, पूर्णिया जिले के भवानीपुर के नवगछिया टोला निवासी बिनोद मंडल की बेटी अंशु कुमारी (17) 3 जून से लापता थी। घर वालों ने इसकी शिकायत थाने में नहीं की।
परिजन लगातार छानबीन करते रहे थे, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। फिर 16 अगस्त को जानकारी मिलती है कि बहियार नहर में एक लड़की का शव मिला है। परिवार के सभी सदस्य मौके पर पहुंचते हैं। शव का चेहरा, कद, काठी और कपड़े को देखकर सभी उसे अंशु ही समझने लगे। फिर परिजन आनन-फानन में अंतिम संस्कार भी कर देते हैं।

अंशु ने 5 जून की सुबह विरंजन से कर ली थी शादी।
अंतिम संस्कार के अगले दिन आया फोन
अंतिम संस्कार के अगले दिन 17 अगस्त की सुबह बिनोद मंडल का फोन बजता है। बिनोद कॉल उठाते हैं। फोन पर आवाज आती है, हेलो… पापा मैं अंशु। पापा मैं जिंदा हूं। मैं मरी नहीं, आपने जिसकी डेड बॉडी जलाई, वो मैं नहीं पापा। इतना सुनने के बाद भी उन्हें विश्वास नहीं होता। इसके बाद अंशु वीडियो कॉल करती है। वह बताती है कि पापा मैं रुपौली हॉल्ट बाजार में एक किराए के मकान में रह रही हूं। मैंने भागकर शादी कर ली है। लड़के का नाम विरांजन कुमार है। विरांजन 24 साल का है और वह भवानीपुर का ही रहने वाला है।

शादी के बाद की अंशु की तस्वीर।
खुद की मौत की खबर पढ़कर किया फोन
अंशु ने कहा कि 24 मई को उसके फोन पर एक रॉन्ग नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले ने अपना नाम विरांजन बताया। दोनों के बीच बातचीत हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हुई। दोस्ती प्यार में बदल गई। महज 10 दिनों में प्यार इतना परवान चढ़ा कि दोनों ने घर से भागकर शादी करने फैसला कर लिया।




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