विश्वव्यापी महामा’री कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए पूरे भारतवर्ष में घोषित लॉकडाउन के कारण असहाय व निर्धन वर्ग की सहायता के लिए शहर के विभिन्न स्वंयसेवी सामाजिक व धार्मिक संगठन निरन्तर सक्रिय है. इसके साथ ही कठोर फैसले सुनाने वाले न्यायाधीशों ने भी इस विषम परिस्थितियों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए जनसेवा, मानवसेवा में पूरी निष्ठा के साथ जुटे हैं.
आज शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेन्द्र कुमार सिंह की आर्थिक पहल पर गायघाट प्रखंड के दो गांवों के असहाय और गरीबों के बीच में वितरित कराने हेतु नि:शुल्क कच्ची खाद्य सामग्रियों से भरे वाहन को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया.

जिला एवं सत्र न्यायाधीश के साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव राजीव रंजन एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मुकेश कुमार ने आज गायघाट प्रखंड के पिरौंछा और बरूआरी गाँव के वंचित परिवारों के लिए रसद सामग्री वितरण वाहन को हरी झण्डी दिखाते हुए कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि वैश्विक संकट के इस समय में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोये.

इस सम्बन्ध में जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेन्द्र कुमार सिंह ने बताया की पैरालीगल वालंटियर्स की मदद से हम जिले के प्रखंडों में वैसे परिवारों को चिन्हित कर रहें हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, या विधवा महिलाएं या दिव्यांग व्यक्ति है और वे जो बिलकुल बेसहारा हैं, उनकी सूची बनाते हुए वैसे व्यक्तियों और परिवारों के बीच 4 किलो चावल, 4 किलो आटा, 1 किलो सरसों तेल, 1 किलो दाल, 1 किलो नमक, 1 किलो आलू, मसाले, नहाने और कपडे धोने का साबुन इत्यादि से भरा पैकेट वितरित कर रहें हैं, और आज इसकी शुरुआत गायघाट प्रखंड के पिरौंछा और बरुआरी गाँव से की गई है. लॉक डाउन रहने तक इसी तरह अलग अलग ग्रामीण इलाकों में चिन्हित कर सूचीबद्ध कर असहायों के बीच निरंतर राहत सामग्रियों का वितरण कराया जाता रहेगा.

आपको बता दें की न्यायपालिका द्वारा किये जा रहें इस सार्थक पहल और मानवीय सेवा को मुजफ्फरपुर न्यूज़ प्रमुखता से दिखाता रहा है, लॉक डाउन के शुरुआती दिनों से ही जिला जज द्वारा पूरे परिवार के साथ गरीबों की मदद में जुटे रहें हैं और उनके बीच खाना, पानी की बोतलें और अन्य सामग्रियों का वितरण करते रहें हैं.

कोरोना वायरस का दंश झेल रहे बिहार में ये पहला मौका देखने को मिल रहा है जब लॉक डाउन की अवधि में न्यायपालिका के कई न्यायाधीश मुजफ्फरपुर जिले में मानव सेवार्थ में जी जान से जुटे हैं.




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