बिहार के विभिन्न जिलों में मुहर्रम अक़ीदत और एहतेराम के साथ मनाया जा रहा है। जहां गया में ताजिया जुलूस निकालने के लिए न केवल मुस्लिम बल्कि हिंदू समुदाय के लोग भी अपने नाम पर जिला प्रशासन और पुलिस से लाइसेंस लेते हैं। यह सिलसिला एक अरसे से चला आ रहा है। इस रिवायत को कायम रखने में जिले के फ़तेहपुर, अतरी ,बथानी समेत जिले के अन्य प्रखंड शामिल हैं।

जिले में ऐसे दर्जनों गांव और इलाके ऐसे हैं जहां मुहर्रम के मौके पर मुस्लिमों के साथ हिंदू भाई भी मुहर्रम मना रहे हैं। ऐसे कई इलाके हैं जहां हिंदुओं द्वारा ताजिया बड़ी अक़ीदत से बना कर इमाम बाड़ों पर रखी जाती है। ये रिवायत सैकड़ों साल पुरानी है।
जिले के प्रखण्डों में, कई ऐसे गांव हैं जहां वर्षों से हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की बेहतरीन मिसाल कायम की जाती रही है। गया जिले के विभिन्न इलाकों में 106 ऐसे हिंदू परिवार हैं जो मुहर्रम में ताज़िया का जुलूस निकालते हैं। उन्होंने अपने नाम से ताजिया जुलूस के लाइसेंस के लिए थाने में इस बार भी आवेदन भी दिया था और उन्हें लाइसेंस भी दिया गया है।
फतेहपुर थाना क्षेत्र कोड़या के दशरथ यादव, भागीरथ प्रसाद यादव व रसमदेव शर्मा, मोरवे गांव के राजनंदन पंडित, भगवानपुर के हरी चौधरी, फरका के प्रकाश चौधरी, खजूरी के सरजू चौधरी, केंदुआ के लखन चौधरी, मतासो के रामधनी पंडित,रक्सी के जगदीश चौधरी, मेयारी के बगुला चौधरी, सतनियां के सुखदेव राम, केवाल के रविंद्र मिस्त्री, गदहियाताड़ के रोहन राजवंशी, जेहलीबीघा के राम चरण चौधरी, बहेरा के योगेंद्र पासवान, सलैयाखुर्द के कपिल भुइंया, राजाबीघा के किशोरी सिंह के नाम पर ताजिया जुलूस निकालने के लिए थाने में आवेदन भी दिया गया था, उनके दरख्वास्त को थाने ने स्वीकार कर लिया है।
जिला पुलिस व लोगों का कहना है कि यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है। इस संबंध में इन लोगों ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में यजीदियों का सामना किया और दुनिया को संदेश दिया कि बुराई अपनाने वाला चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो। सच के सामने वो गुमनाम हो जाता है। मैदान-ए-कर्बला में अन्याय, जुल्म, अहंकार के विरूद्ध हक और सच्चाई के लिए हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों द्वारा दी गई कुर्बानी अमर है।




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