राधे राधे… मैं नंदिनी गुप्ता… छोटे कस्बे से निकली पहली लड़की… कोटा जैसे शहर से मुंबई जाकर अपने सपनों को साकार करने के लिए कोशिश करना आसान नहीं था। लेकिन, माता-पिता के सपोर्ट से मैंने सपना साकार कर लिया। ये किसी चैलेंज से कम नहीं था। फेल्योर के सामने चैलेंज होता है। 9वीं में गणित में फेल हो गई थी। 70 में से 15 अंक आए थे। निराश हो गई। शिक्षकों ने कहा- पढ़ाई जारी रखो। उनकी बात मानी। आखिर मैनेजमेंट में सेकेंड पॉजिशन बनाई। अब मिस इंडिया भी बन गई। किसी ड्रीम को अचीव करने को पैशन बनाओ। उस पर काम करो। कठिन परिश्रम करो। अपना गोल सेट करिए। तभी इस तरह का मुकाम हासिल कर सकेंगे। बैकग्राउंड मायने नहीं रखता, कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां से आते हैं।
ये कहना है मिस इंडिया बनकर अपने शहर कोटा पहुंची नंदिनी गुप्ता का। उन्होंने मेडिकल और इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स से बात करते हुए ये बातें कहीं।

नंदिनी बुधवार सुबह अपने पैतृक गांव सांगोद के भांडाहेडा गांव पहुंची।
इंग्लिश में कमजोर थीं
नंदिनी ने कहा- हाड़ौती से हूं, इसलिए हाड़ौती अच्छी बोलना आती है। साथ में हिंदी भी, लेकिन इस फील्ड में इंग्लिश कमजोर होना सबसे बड़ी समस्या थी। उस लेवल पर हिंदी में कम्युनिकेट में थोड़ी परेशानी होती है। इंग्लिश में सुधार किया। अब नई जर्नी की शुरुआत है। आप सभी के सिर पर भी एक ताज है। आपको इसका पता है। ये चुनौतियां, असफलता और कठिनाइयों का है। हम लड़कियां हैं। ऐसी लड़कियां जो बहुत कुछ कर सकती हैं। इसके लिए मेहनत करिए। चुनौतियों से डरे नहीं। संघर्ष करें। माता-पिता और शिक्षकों की बात मानिए। हमें अवसर भुनाना आना चाहिए।
उन्होंने कहा- मौका मिलेगा तो बॉलीवुड भी जाउंगी
बॉलीवुड में जाने संबंधी एक सवाल के जवाब में नंदिनी का कहना था कि कोटा ही नहीं, बल्कि देशभर के किसानों की बेटी हूं। बॉलीवुड में अभिनय का मौका मिलता है तो जरूर जाउंगी।
घर आने की खुशी।



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