शहर की तीन रेल गुमटियाें पर आरओबी का निर्माण नहीं हाेने से हर दिन औसतन 5 घंटे में करीब एक लाख से अधिक लाेग फंसते हैं। वर्ष 2019 में ही रेल मंत्रालय और राज्य सरकार ने तीनाें स्थानाें पर आरओबी निर्माण कराने के लिए एकल निकाय के तहत करार किया था। लेकिन, अब तक इस दिशा में पुल निर्माण निगम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका है। नतीजा यह है कि शहर की गाेबरसही, सादपुरा और रामदयालु नगर रेल गुमटी पर लाेग हर दिन फंस रहे हैं। यही नहीं, कई बार ऐसी स्थिति हो जाती है कि भीड़ के कारण गुमटी बंद नहीं हो पाती और ट्रेन को रोकना पड़ता है। इन तीनाें रेल गुमटियाें पर आरओबी निर्माण काे लेकर एकल निकाय याेजना के तहत राज्य सरकार और रेल मंत्रालय के बीच 7 मई 2019 में ही एमओयू साइन हुआ था।
इसके अनुसार, इन तीनाें रेल गुमटियाें में आने वाले खर्चे काे राज्य सरकार और रेलवे काे ही खर्च करना है। लेकिन, आरओबी निर्माण के लिए काेई कार्रवाई शुरू नहीं कर पाई है। आरओबी निर्माण कागजाें में ही सिमट कर रह गया है। गाेबरसही, रामदयालुनगर और सादपुरा गुमटी का ट्रैफिक व्हीकल यूनिट (टीवीयू) प्रतिदिन एक लाख से अधिक है। फिर भी यहां आरओबी निर्माण वर्षाें से प्रस्तावित ही है। रेलवे के अनुसार, जंक्शन से प्रतिदिन करीब 90 ट्रेनें और मालगाड़ियां खुलती हैं। कई बार दाेनाें तरफ से ट्रेन पास हाेने तक गुमटी बंद रहती है। दाे ट्रेनाें के पास हाेने में कम से कम 15 से 20 मिनट का समय लगता है। इसकाे लेकर हमेशा हंगामा और जाम की स्थिति बनी रहती है।
एमओयू साइन…आरओबी के निर्माण पर सभी खर्च राज्य सरकार काे ही करना है
दरअसल, मुजफ्फरपुर सांसद अजय निषाद के लाेकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में रेल राज्य मंत्री राव साहेब पाटिल दानवे ने सादपुरा, गाेबरसही और रामदयालुनगर गुमटी पर आरओबी निर्माण नहीं हाेने के बारे में जानकारी दी। उन्हाेंने सांसद काे भेजे पत्र में कहा कि किसी भी गुमटी पर आरओबी निर्माण खर्च में रेल मंत्रालय और राज्य सरकार दाेनाें की हिस्सेदारी हाेती है। इसके लिए रेल मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच 7 मई 2019 काे ही करार हुआ था। इसमें एकल निकाय के आधार पर इस आरओबी का निर्माण की स्वीकृति दी गई है। यानी सभी खर्च राज्य सरकार काे करना है। गाेबरसही, रामदयालुनगर, सादपुरा गुमटी पर टीवीयू एक लाख से अधिक है। वर्ष 2015 में आरओबी निर्माण की स्वीकृति मिली और 2019 में करार के बाद राज्य सरकार ने पुल निर्माण निगम से फिजिबिलिटी सर्वे कराया। उसके बाद से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में है।
मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर रेलखंड…
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