MUZAFFARPUR

बिहार में जन्मा ‘हार्लेक्विन बेबी’ दुनिया में ऐसे सिर्फ 300 बच्चे

पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया में एक मां ने ‘हार्लेक्विन बेबी’ को जन्म दिया है. मामला बनमनखी थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर आठ का है. जन्म होते ही ओटी अटेंडेंट ने कहा कि बच्चा तो एलियन जैसा है. आम बच्चों से अलग हटकर हार्लेक्विन बेबी होने की बात जैसे ही ग्रामीणों को मिली वो बच्चे के घर उसे देखने के लिए दौड़े आए. कुछ लोगों ने तो उसकी मां के गोद में पैसे भी देना शुरू कर दिया.

कैसा है हार्लेक्विन बेबी?

बच्चे को देखने पहुंचे ग्रामीण बता रहे हैं कि वो जन्म से ही अजीब आवाज निकाल रहा है. वहीं देखने में बच्चे का पूरा शरीर सफेद है. उसकी स्किन जगह-जगह से फटी है. आंख और मुंह भी आम बच्चों से काफी अलग और बड़े हैं. बच्चा लंबी सांसें ले रहा है, जबकि मां पूरी तरह स्वस्थ है.

बच्चे को देखते ही मां और परिजनों के होश उड़ गए. बच्चे का जन्म बनमनखी अनुमंडलीय अस्पताल में हुआ है. वहीं ग्रामीण बच्चे को किसी दैवीय शक्ति का प्रकोप बताकर उसक पर चढ़ावा भी चढ़ाने लगे हैं.

बता दें कि मामला बनमनखी के काझी वार्ड नंबर 8 का है. कुछ ही महीने पहले बच्चे की पिता सियाराम मंडल की अचानक मौत हो गई थी. बच्चे का जन्म दो दिन पहले गुरुवार को बनमनखी के अनुमंडल अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी से हुआ है.

डॉक्टर बीमारी को लाइलाज बता रहे हैं. अस्पताल के चिकित्सक प्रभारी प्रिंस कुमार ने बताया कि काझी वार्ड नंबर 8 की महिला गुरुवार को डिलीवरी के लिए पहुंची थी. इसी रोज नॉर्मल डिलीवरी से बच्चे का जन्म हुआ था. बच्चा गोरा और स्वस्थ था लेकिन जन्मजात विकृति के कारण उसकी त्वचा असामान्य है.

डॉक्टर का कहना है कि हार्लेक्विन बेबी जीन की कमी के कारण पैदा होता है. 3 लाख में बच्चों में से 1 बच्चे में ये बीमारी होती है. दुनिया में इस बीमारी के 300 केस हैं. इस तरह के बच्चे दुर्लभ अनुवांशिक विकार (हार्लेक्विन इक्थियोसिस) से पीड़ित होते हैं. इस बीमारी में शरीर में तेल बनाने वाली ग्रंथियां नहीं होने से स्किन फटने लगती है.

दुनिया में अब तक 300 मामले

आंखों की पलके पलटने की वजह से चेहरा बदसूरत दिखने लगता है. पूरी दुनिया में अब तक इस बीमारी के लगभग 300 मामले सामने आए हैं. ज्यादातर मामलों में जन्म के कुछ घंटे बाद ही बच्चे की मौत हो जाती है. अगर बच्चा जिंदा भी रह गया तो ज्यादा दिन जीने की संभावना नहीं रहती है, क्योंकि इसे लाइलाज बीमारी माना जाता है.

 

 

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