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फुलवारी शरीफ में मुसलमानों को भड़काने की साजिश:हिंसा फैलाने का था प्लान,

पटना के फुलवारी शरीफ में अंदर ही अंदर मुसलमानों को भड़काने की भी बड़ी साजिश चल रही थी। धर्म के नाम पर मुसलमानों को जबरन उकसाया जा रहा था। फुलवारी शरीफ में रहने वाले मुसलमान असली मुसलमान कब बनेंगे? इस बात का उनसे सबूत मांगा जा रहा था। उन्हें यह कहकर उकसाने की कोशिश हो रही थी कि नबी की शान पर सारी दुनिया के मुसलमान आवाज उठा रहे हैं। तुम आवाज कब उठाओगे? इन सब भड़काउ बातों को लिखकर एक पम्पलेट छपवाया गया था। जिसे व्हाट्एसप और दूसरे सोशल नेटवर्क के जरिए फुलवारी शरीफ में रहने वाले मुसलमान लोगों के मोबाइल पर भेजा जा रहा था। सूत्र बताते हैं कि यह सब कुछ मई महीने से ही वहां चल रहा था।

थानेदार के सरकारी नंबर पर किसी ने भेजा था पम्पलेट

धर्म के नाम पर फुलवारी शरीफ के मुसलमानों को किस तरह से भड़काया जा रहा है, इस बात का खुलासा तब हुआ जब पिछले महीने 10 जून को थानेदार एकरार अहमद के सरकारी मोबाइल नंबर के व्हाट्सएप पर एक पम्पलेट आया। जिसमें लिखा था ‘शर्म करो डूब मरो, शर्म करो डूब मरो। गोश्त खाकर मुसलमान बनने वाले फुलवारी शरीफ के आवाम असली मुसलमान कब बनोगे? नबी की शान पर कब बोलोगे? सारी दुनिया के मुसलमान आवाज उठा रहे हैं। तुम कब उठाओगे? क्या यूहीं मुर्दा बने रहोगे? याद रखना कल कयामत में अल्लाह ताला तुमसे सवाल कर बैठे तो क्या जवाब दोगे और क्या मुंह दिखाओगे अपने रब को? बाद नामज ए जुमा 10.06.22 को जामा मस्जिद नया टोला पहुंचे और इश्के रसूल का सबूत दें।’

दोनों फुलवारी शरीफ के निवासी हैं।

दोनों फुलवारी शरीफ के निवासी हैं।

संप्रादायिक दंगा कराने की थी कोशिश

इस मामले में 11 जून को फुलवारी शरीफ के थानेदार एकरार अहमद के लिखित बयान पर IPC की धारा 153A, 295, 295A, 120B और 34 के तहत FIR नंबर 663/22 दर्ज हुई थी। जिसमें साफ तौर पर थानेदार ने लिखा कि पम्पलेट वायरल कर दो समुदायों के बीच विद्वेष फैलाने, माहौल खराब करने और सांप्रदायिक दंगा कराने की तैयारी थी। दंगा कराकर जानमाल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। इसी उद्देश्य से ही पम्पलेट छपवाकर वायरल करवाया गया। जो पूर्ण रूप से असंवैधानिक और गैर कानूनी है।

आज तक नहीं हुई किसी की गिरफ्तारी

फुलवारी शरीफ के अंदर किस तरह का खौफनाक खेल चल रहा है? इस बात की जानकारी एक महीने पहले पुलिस को हो चुकी थी। मगर, इस खेल में कौन लोग शामिल हैं? इसका पता लगाने के लिए पुलिस ने तेजी से जांच नहीं की। इस मामले में बड़ी लापरवाही बरती। थानेदार के बयान पर दर्ज केस के जांच की जिम्मेवारी सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार को सौंपी गई थी। केस अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था। ये अज्ञात लोग कौन हैं? जो शांत माहौल को खराब करने में लगे थे? ये कौन लोग हैं जो धर्म के नाम फुलवारी शरीफ के मुसलमानों को उकसाने में जुटे थे? शनिवार को थानेदार एकरार अहमद ने बताया कि इस केस में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

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