सागर: बुंदेलखंड के सागर में चार-पांच साल से काली हल्दी की खेती का चलन बढ़ा है. इसमें सामान्य हल्दी की तुलना में 5 से 6 गुना अधिक मुनाफा किसान भाई कमा रहे हैं. इतना ही नहीं, अब यहां की काली हल्दी की डिमांड भारत के अलावा दुबई, अफ्रीका और ओमान तक होने लगी है. औषधीय गुण होने के चलते काली हल्दी की डिमांड फार्मा कंपनी, आयुर्वेद में होती है, जिसके चलते इसके अच्छे दाम मिलते हैं,

दरअसल, मल्टी लेयर फार्मिंग के जनक आकाश चौरसिया 5-6 साल से काली हल्दी की खेती कर रहे हैं. शुरुआत में प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल उपज काली हल्दी की निकल रही थी, लेकिन सही मैनेजमेंट और मिट्टी के उपचार के चलते लगातार इसमें बढ़ोतरी हो रही है. महज 6 साल में चार गुना उपज लेने लगे हैं. इस साल 40 क्विंटल काली हल्दी निकली है. आकाश द्वारा प्योर जैविक खेती की जा रही है. केमिकल का उपयोग नहीं करते हैं.

ऐसे कमाएं मुनाफा
आकाश ने बताया कि काली हल्दी की कीमत औसत 150 से 200 रुपये किलो तक है. इसी भाव से 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ मुनाफा लागत काट कर मिल जाता है. अब इसमें अगर काली हल्दी का बीज बना लिया जाए तो यह 600 रुपये किलो में जाती है. अगर पाउडर बना लिया जाए तो 2 से 3000 तक में कंपनियां खरीद लेती हैं. फिर मुनाफा भी काफी अधिक बढ़ जाता है

काला सोना है ये खेती
आकाश ने आगे बताया, काली हल्दी 9 महीने की फसल होती है. इसे खेतों का काला सोना या ब्लैक गोल्ड के नाम से भी जाना जाता है. एक बार लगाने के बाद केवल पानी और खरपतवार का ही मैनेजमेंट करना होता है. अगर यह सब कुछ सही रहा तो फिर बंपर पैदावार मिलती है





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