बिहार की सियासत इस वक्त चरम पर है। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चल रही वोटिंग ने सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल मचा दी है। राजनीतिक गलियारों में हर पल बदलते समीकरणों पर नजर रखी जा रही है और हर वोट को सत्ता की बाज़ी का निर्णायक माना जा रहा है।

राजधानी पटना स्थित बिहार विधानसभा में मतदान का सिलसिला जारी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से अब तक 176 विधायक अपना वोट डाल चुके हैं, जबकि विपक्षी महागठबंधन के 37 विधायकों ने मतदान किया है। राष्ट्रीय जनता दल के 24 विधायकों ने वोटिंग कर दी है, लेकिन ढाका से विधायक फैसल रहमान का अभी भी इंतजार किया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे सियासी सस्पेंस और गहरा गया है। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीन विधायक अब तक वोट डालने नहीं पहुंचे हैं। इनमें सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास से पार्टी नेताओं का संपर्क नहीं हो पा रहा है।

राज्यसभा की इन पांच सीटों के लिए इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मैदान में 6 उम्मीदवार हैं। ऐसे में मतदान जरूरी हो गया है। चुनावी गणित के मुताबिक एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की जरूरत है। सत्ताधारी एनडीए के पास कुल 202 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है, जिससे उसका पलड़ा भारी माना जा रहा है।

इसी बीच विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि महागठबंधन इस चुनाव में जीत हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से है और वे हमेशा उससे मुकाबला करते रहेंगे। कांग्रेस विधायकों के गायब होने के सवाल पर तेजस्वी ने इसे महज अफवाह बताते हुए कहा कि “बीजेपी का काम ही अफवाह फैलाना है।”

राजनीतिक नाटक के बीच कई दिलचस्प तस्वीरें भी सामने आईं। मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह जेल से आकर वोट डालने पहुंचे और उन्होंने भविष्य में चुनाव न लड़ने का ऐलान भी कर दिया। वहीं बिहार सरकार के मंत्री बिजेंद्र यादव अस्वस्थ नजर आए और दो लोगों के सहारे विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ते दिखे।

इस बीच एक और दिलचस्प दृश्य तब सामने आया जब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के परिवार की सदस्य तेजस्वी यादव के कमरे से निकलती दिखीं, जिससे सियासी चर्चाओं का दौर तेज हो गया। फिलहाल मतदान शाम 4 बजे तक चलेगा और इसके बाद 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। देर शाम तक यह साफ हो जाएगा कि बिहार की इस सियासी बाज़ी में आखिर किसका दांव सफल होता है और कौन मात खाता है।

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