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पटना में बैचलर पार्टी के नाम पर जाती थीं लड़कियां:कम उम्र की लड़कियों का रेट 20 हजार, 30 साल से ज्यादा तो 3 हजार

पटना में बैचलर और डांस पार्टियों में सेक्स रैकेट चल रहा है। इसके लिए कम उम्र की लड़कियों की सप्लाई हो रही है। डिमांड के लिए 4 राज्यों में मानव तस्करों का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के साथ बिहार के अलग-अलग जिलों से मजबूर लड़कियों को बैचलर पार्टियों के लिए लाया जा रहा है

उम्र के हिसाब से रेट फिक्स है। 16 से 17 साल तक की लड़कियों की डिमांड सबसे अधिक है। इसके लिए 20 हजार तक की वसूली करते हैं। कम उम्र और सुंदर दिखने वाली लड़कियों के लिए तो एडवांस बुकिंग होती है। जानिए पटना में किस तरह चल रही बैचलर और डांस पार्टियां, ऑन डिमांड कैसे सप्लाई हो रहीं माइनर लड़कियां ….

दो वर्ड के कोड से जिस्म का कारोबार

पटना में अलग-अलग वर्ग के लिए सेक्स रैकेट का बड़ा कारोबार चल रहा था। यह पूरा कारोबार दो वर्ड के कोड पर चल रहा था। पटना का गुलशन उर्फ विक्कू छत्तीसगढ़ की रामेश्वरी उर्फ छोटी सिंह के साथ मिलकर बड़ा सेक्स रैकेट चला रहा था। गुलशन किंग म्यूजिकल ग्रुप और जादूगर गुलशन किंग के नाम से लड़कियों की सप्लाई कर रहे थे।

गर्दनीबाग इलाके में छापे में मिलीं लड़कियां।

गर्दनीबाग इलाके में छापे में मिलीं लड़कियां।

जादूगर गुलशन किंग मॉडल और लड़की की सप्लाई करने के लिए पूरा नेटवर्क बनाया था। बैचलर और डांस पार्टियों में लड़कियों की सप्लाई के लिए अलग-अलग लड़कों को लगाया गया था, जिससे पुलिस को भी भनक नहीं लग रही थी। पूरा खेल दो वर्ड के कोड से चलता था। कस्टमर तक लड़कियों को लेकर पहुंचाने वाले कोड पर ही काम करते थे। लड़कियों की बुकिंग के समय ही जो कोड दिया जाता है, उसी कोड के आधार पर डिलिवरी की जाती थी।

जक्कनपुर और गर्दनीबाग थाना क्षेत्र में चल रहा सेक्स रैकेट का पूरा खेल एक प्राइवेट कंपनी की तरह ही था। डीलिंग और डिलीवरी से लेकर कैश की वसूली अलग-अलग व्यक्ति के जिम्मे थी। लड़कियों को ले जाने वाले ग्राहकों को पहले उम्र के साथ पूरी प्रोफाइल बताई जाती थी। पसंद आने पर रेट की बात होती थी। माइनर की डिमांड के कारण ऐसी लड़कियों की प्रोफाइल अधिक संख्या में होती थी।

गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से ही लड़कियों की सप्लाई पार्टियों और होटलों में की जाती थी।

गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से ही लड़कियों की सप्लाई पार्टियों और होटलों में की जाती थी।

दीदी की सहेली ने बुलाया पटना, दलालों से कर ली डीलिंग

बैचलर और डांस पार्टियों के नाम पर सप्लाई होने वाली उत्तर प्रदेश के कानपुर की 16 साल की लड़की को उसकी दीदी के दोस्त ने इस धंधे में उतार दिया है। पीड़िता ने बताया कि दो साल पहले उसके माता-पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार वालों के व्यवहार से वह परेशान हो गई।

पटना में ब्याही बड़ी बहन की एक दोस्त ने उसे नौकरी के नाम पर पटना बुला लिया। दो चार दिन घर में रखने के बाद गुलशन के हाथों उसकी डीलिंग कर दी। गुलशन घर में ले जाने के बाद पहले डांस पार्टियों के साथ अन्य प्रोग्राम में भेजने लगा। इस दौरान छोटी सिंह ने पैसे का लालच देकर उसे देह व्यापार के लिए प्रेरित कर दिया। इसके बाद वह लगभग एक साल से ऐसे ही पार्टियों और होटलों के लिए बुक होने लगी।

लड़कियों को 500 देकर, वसूलते थे 20 हजार

पटना में हुए सेक्स रैकेट के खुलासे में चौंकाने वाली बात सामने आई है। गुलशन और छोटी सिंह लड़कियों को बैचलर व डांस पार्टियों के लिए 500 रुपए देते थे। जबकि ग्राहकों से उम्र के हिसाब से पैसा वसूलते थे। बचपन बचाओ आंदोलन के राज्य समन्वयक अर्जित अधिकारी का कहना है कि पटना अंतर राज्यीय मानव तस्करों का बड़ा गैंग काम कर रहा है।

मजबूर लड़कियों को नौकरी के नाम पर लाया जाता है। इसके बाद उनसे देह व्यापार कराया जाता है। अर्जित का कहना है कि अगर वह स्टिंग ऑपरेशन नहीं कराते तो पकड़ में नहीं आते। यहां लड़कियों के साथ बच्चियों को भी लाया जा रहा था। बिहार में उन्हें मोटिवेट करने के बाद सेक्स रैकेट में काम करने के लिए तैयार कर दिया जाता था। जितनी भी लड़कियां पकड़ी है, हर कोई मजबूर हैं। अर्जित का कहना है कि 5 से 6 हजार का रेट एक नाइट की डीलिंग करते हैं। मोबाइल में मिले डिटेल में पता चला है कि माइनर के लिए 20 हजार तक वसूले गए हैं।

स्टिंग ऑपरेशन से हुआ खुलासा

पटना में एक साल से अधिक समय से बैचलर और डांस पार्टियों में लड़कियों की सप्लाई करने वाले गैंग की भनक पुलिस को भी नहीं थी। ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर काम करने वाली संस्था बचपन बचाओ आंदोलन को इसकी जानकारी हुई। पुलिस अफसरों के साथ संस्था ने प्लानिंग बनाई की और एक बड़ा स्टिंग ऑपरेशन किया गया। संस्था ने दो युवकों को ग्राहक के तौर पर तैयार किया। एक सप्ताह से माइनर लड़कियों की डिमांड की जा रही थी।

फोटो भेजकर लड़कियों को पंसद भी कराया जा रहा था। सोमवार को दोनों ग्राहकों के लिए दो माइनर लड़कियों की डील पक्की हो गई, एक के लिए 16 हजार रुपए फिक्स हो गया। व्हाट्सएप के जरिए लड़की को पसंद कराने से लेकर रेट तक फाइनल किया गया।

गैंग के सदस्य व्हाट्सएप कॉल से ही संपर्क में थे, लेकिन डील फाइनल होने के बाद बातचीत होने लगी। मंगलवार की रात जक्कनपुर थाना क्षेत्र के प्रांजल होटल के कमरा नंबर 202 में दो लड़कियों की डिलीवरी पक्की हुई। पुलिस ने छत्तीसगढ़ की 5, यूपी की एक और पश्चिम बंगाल की एक लड़की बरामद किया है।

सिगरेट बुझी भी नहीं थी कि पहुंच गई पुलिस

प्रांजल होटल के कमरा नंबर 202 में दोनों युवक लड़की के इंतजार में पहुंच गए। ग्राहक बनकर गए दोनों युवकों ने होटल के मैनेजर से बात कराई तो मामला पूरी तरह से सेट हो गया। कमरे में कंडोम के साथ पानी और सिगरेट भी पहुंच गया। रात 9 बजे लड़कियों की डिलिवरी से ठीक पहले कैश वसूलने के लिए एक लड़का आया और बताया कि माइनर की बुकिंग कहीं वीआईपी गेस्ट के लिए हो गई। जिन दो लड़कियों के आने की बात कही, उसमें एक 16 साल की और दूसरी 30 साल की लड़की थी। अचानक से दो माइनर की डील कैंसिल होने से रेट में समझौता हुआ और 12 हजार में दोनों लड़कियों की दोबारा डील हुई।

डील पक्की होते ही कैश वसूलने वाले की एक कॉल पर दोनों लड़कियां कमरे में आ गईं। दोनों की डिलीवरी करने दूसरा युवक आया। लड़कियां तैयार हो रही थीं और दोनों एजेंट सिगरेट की कश मारकर बातचीत कर रहे थे। सिगरेट बुझी भी नहीं थी कि कमरे की बेल बजी और दरवाजा खुलते ही पुलिस टीम ने छापा मार दिया। जक्कनपुर थाना से पुलिस ने दोनों लड़कियों के साथ होटल के मैनेजर व एक कर्मी को पकड़ लिया। पूछताछ में गर्दनीबाग के सरिस्ता बाद में लड़कियों के सेंटर का खुलासा हुआ, जिसके बाद पुलिस ने वहां भी छापेमारी की।

पार्टियों के साथ होटलों में बड़ा नेटवर्क

गर्दनीबाग थाना क्षेत्र के सरिस्ताबाद से ही लड़कियों की सप्लाई अलग-अलग पार्टियों और होटलों में की जाती थी। सरिस्ताबाद में नन्हें कुमार यादव के तीन मंजिला मकान के फर्स्ट फ्लोर को गुलशन ने 15 हजार रुपए महीना किराए पर ले रखा था। यहां दो यूपी, छत्तीसगढ़ और बंगाल के साथ बिहार के अलग-अलग जिलों से आने वाली लड़कियों को रखा जाता था। पुलिस ने यहां से गुलशन की पार्टनर छोटी सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने यहां से 5 लड़कियों को बरामद किया। इसमें एक लड़की माइनर बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि एक कमरे में गुलशन और छोटी सिंह रहते थे और दूसरे कमरे में व हॉल में सप्लाई वाली लड़कियों की व्यवस्था की गई थी। लड़कियों को छोटी सिंह के धंधे में उतारने के लिए मोटिवेट करती थी। नौकरी के नाम पर लाई जाने वाली लड़कियों को मॉडलिंग का सपना दिखाकर धंधे में लाया जा रहा था।

डमी ग्राहक का कहना है कि जानकारी मोबाइल पर मिली थी।

डमी ग्राहक का कहना है कि जानकारी मोबाइल पर मिली थी।

डमी ग्राहक की जुबानी डीलिंग की कहानी

लड़कियों की डीलिंग करने वाले डमी ग्राहक का कहना है कि जानकारी मोबाइल पर मिली थी। एक हफ्ते की डीलिंग के बाद लड़कियों की बुकिंग फाइनल हुई थी। होटल में लड़कियों को भेजने के लिए कई तरह से कॉल कर यह पता लगाया गया कि कहीं धर-पकड़ नहीं होने पाए। संस्था ने पुलिस के साथ मिलकर सेटिंग ऐसी की थी कि कोई संदेह ही नहीं हुआ और दलाल ने दोनों लड़कियों की डिलीवरी कर दी।

प्लानिंग के कारण ही रंगे हाथ होटल से लड़कियों को बरामद किया गया। हालांकि गुलशन पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया। धंधे की पार्टनर छोटी सिंह को पुलिस ने पकड़ा है। लड़कियों को लेकर होटल आया दलाल फरार हो गया। अब पुलिस गुलशन की तलाश में छापेमारी कर रही है।

सेक्स रैकेट में शामिल लड़कियों की ट्रेनिंग

सूत्रों की मानें तो सेक्स रैकेट के लिए काम करने वाली लड़कियों को पूरी तरह से ट्रेंड किया जाता है। उन्हें यह सिखाया जाता है कि किस तरह से कस्टमर को खुश करना है। उन्हें छोटी सिंह ट्रेंड करती थी। बताया जाता है कि पकड़े जाने पर यह बताने को कहा जाता है कि वह अपनी परिस्थिति और मर्जी से इस धंधे में आई हैं। उम्र को लेकर भी रटाया जाता है। माइनर को भी 18 साल से अधिक उम्र बताने को कहा जाता है। पकड़ी गई लड़कियों से यह खुलासा हुआ है।

वॉट्सऐप पर तस्वीर भेजते थे

किसी भी लड़की के पास कोई पहचान पत्र नहीं था। इसके पीछे बड़ा कारण माइनर साबित नहीं होने का खेल है। सूत्रों की माने तो गुलशन डांस के नाम पर शहर के कई घरों में भी दाखिल होता था और वहां की लड़कियों को भी वह इस धंधे में उतार चुका था। वॉट्सऐप पर वह लड़कियों की जो तस्वीर भेजता था, वह स्थानीय होती थी। लेकिन डील फाइनल होने के पहले उनके बारे में कोई जानकारी नहीं देता था। बचपन बचाओ आंदोलन के मुताबिक एक सप्ताह में दो दर्जन से अधिक ऐसी लड़कियों की फोटो गुलशन ने शेयर भी की है। अब पुलिस की इसकी जांच में पड़ताल में जुटी है, जिससे पटना का पूरा कनेक्शन बेनकाब किया जा सके।

लड़कियों को सिर्फ 500 रुपए मिलते

लड़कियों की सप्लाई से लाखों का कलेक्शन होता था। इसका खुलासा पुलिस के हाथ लगे चेक और बैंक के कागजात से हुआ है। पुलिस सूत्रों की माने तो लड़कियों को शुरुआती दौर में इस धंधे में लाने के लिए थोड़ा ज्यादा पैसा दिया जाता था, लेकिन बाद में रेट कम कर दिया जाता था। जब वह पुरानी हो जाती थी तो उन्हें एक बार के लिए 500 रुपए ही दिए जाते थे। बचपन बचाओ आंदोलन के अर्जित बताते हैं कि बिहार में बड़ा खेल चल रहा है।

अगर तह तक जांच की जाए और पूरा नेटवर्क खंगाला जाए तो कई राज्यों से गिरफ्तारी होगी। ज्यादातर लड़कियां मजबूर होती हैं। इसके लिए अलग-अलग राज्यों में दलालों का नेटवर्क उन्हें चिह्नित करता है। ऐसी लड़कियों को टारगेट करने के बाद किसी न किसी बहाने से पटना लाया जाता है। यहां से अलग-अलग जिलों में भी भेजा जाता है। कई राज्यों का नेटवर्क बिहार तक फैला है। लड़कियों के बिहार तक अन्य राज्यों से आने का कनेक्शन खंगाला जाए तो सेक्स रैकेट का बड़ा खुलासा होगा। सेक्स रैकेट की जड़ तक जाना जरूरी है। क्यों और कैसे लाया गया इसका खुलासा होना चाहिए। यह अंतर राज्यीय ट्रैफिकिंग का गिरोह है जो लड़कियों की तस्करी कर उन्हें देह व्यापार के धंधे में ला रहा है।

कानूनी दांव पेंच में बच जाते हैं सरगना

सेक्स रैकेट के धंधेबाजों की जांच गंभीरता से नहीं हो पाती है। पुलिस सेक्स रैकेट के खुलासे के बाद आगे की कड़ी की जांच नहीं कर पाती है। ऐसे में पूरा नेटवर्क नहीं खुल पाता है। यह पहली बार नहीं है, जब कई राज्यों की लड़कियां बिहार में देह व्यापर के धंधे में संलिप्त पाई गई हैं। पूर्व में भी उत्तर प्रदेश, बंगाल और अन्य राज्यों का कनेक्शन सामने आया है। पुलिस ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लेती है।

इस कारण से आरोपियों को जमानत मिल जाती है। जब भी मानव तस्करी का मामला दर्ज होता है तो उनकी जमानत थोड़ी मुश्किल हो जाती है। जांच की झंझट को लेकर पुलिस ऐसे मामलों की तह तक पहुंचने की कोशिश ही नहीं करती है। हालांकि बचपन बचाओ संस्था की पहल और स्टिंग के कारण इस मामले में पुलिस ने गंभीरता दिखाई है। खुलासे के बाद पुलिस संबंधित राज्यों की पुलिस से भी सामंजस्य बनाने की बात कह रही है।

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