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परेशानी:सदर अस्पताल में सप्ताह में पांच दिन नहीं खुलता हड्डी रोग विभाग

सदर अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की पदस्थापना हुई है, फिर भी हड्डी रोग विभाग का ओपीडी रोज नहीं चल रहा है। अस्पताल प्रशासन हड्डी रोग विभाग को सप्ताहिकी ओपीडी बना दिया है। इस वजह से हड्डी रोग से संबंधित मरीजों को इलाज के लिए सदर अस्पताल आकर वापस लौटना पड़ता है। फिर उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में ही देकर इलाज करानी पड़ती है। इससे सदर अस्पताल में हड्डी रोग से संबंधित निशुल्क इलाज का सपना टूट रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने से मरीजों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। सदर अस्पताल में डॉक्टर आलोक कुमार सिन्हा की हड्डी रोग विशेषज्ञ के तौर पर पदस्थापना है। वे छपरा से आते हैं, उन्हें हड्डी रोग विभाग के ओपीडी में केवल शुक्रवार को इलाज की जिम्मेदारी दी गई है, बाकी इमरजेंसी कक्ष में उन्हें 2 दिन ड्यूटी दी गई है। मंगलवार की सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक तथा गुरुवार को नाइट ड्यूटी दी गई है। वे गुरुवार को रात्रि में अपनी ड्यूटी करने आते हैं और नाइट ड्यूटी के बाद फिर शुक्रवार को ओपीडी ड्यूटी कर छपरा चले जाते हैं। वहीं पर उनका क्लीनिक है। नाइट ड्यूटी के नाम पर अस्पताल प्रशासन द्वारा उन्हें ओपीडी ड्यूटी करने से बचाया जा रहा है। जबकि सरकारी नियमावली के अनुसार प्रत्येक डॉक्टर को सप्ताह में कम से कम 42 घंटे ड्यूटी करनी है, लेकिन उन्हें सप्ताह में 6 दिन के बजाय केवल 3 दिन ड्यूटी दी गई है। वह भी महज 26 घंटे। जबकि विशेषज्ञ डॉक्टर से विशेषज्ञ ओपीडी कराना है। इधर मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने से 300 रुपया फी देना पड़ता है। इसके अलावा एक्सरे कराने में खर्च करनी पड़ती है। साथ ही प्राइवेट अस्पतालों से दवाएं भी खरीदनी पड़ती है। इस तरह मरीजों को कम से कम 2000 रूपए खर्च करना पड़ता है। इस तरह गरीबों को हड्डी से संबंधित इलाज कराने आने में कम से कम 2000 घर से इंतजाम करना पड़ता है।

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