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कालाबाजारी:नालंदा में लखीसराय, शेखपुरा और दिल्ली के किसानों को बेच रहे खाद

उर्वरक की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए विभाग द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है लेकिन दुकानदार भी नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। दुकानदारों और विभाग के बीच तू डाल डाल तो मैं पात -पात की स्थिति है। खाद की कालाबाजारी के खेल में एक नया खुलासा हुआ है। जिले के कुछ खाद विक्रेता अपने जिले के किसानों को खाद देने के बजाय दूसरे जिले व राज्य के किसानों को खाद बेच रहे हैं। खासकर आस-पास के सीमावर्ती जिलों के इलाके में इस तरह का खेल ज्यादा खेला जा रहा है। कालाबाजारी का ऐसा ही एक नया मामला सरमेरा प्रखंड के तोरा गांव से सामने आया है। खाद विक्रेताओं की टॉप 20 की सूची के आधार पर जब विभागीय अधिकारियों द्वारा जांच की गई तो यह मामला उजागर हुअा। शंकर खाद भंडार के संचालक द्वारा 1 जुलाई से 3 अगस्त तक 147 बोरा यूरिया की बिक्री की गई है। जिसमें नालंदा के किसानों को कम और पड़ोस के शेखपुरा जिले के किसानों को ज्यादा खाद बिक्री की गई है। इतना ही नहीं रेकर्ड के अनुसार तो लखीसराय और दिल्ली के किसानों को भी खाद बेची गई है। स्टॉक में भी पाया गया अंतर: डीएओ ने बताया कि जांच के दौरान स्टॉक में भी काफी अंतर पाया गया है। पॉश मशीन में खाद बिक्री तो दिखा दी गयी है। लेकिन दुकान के स्टॉक का सत्यापन में ज्यादा खाद की मात्रा पायी गयी है। पॉश मशीन में डीएपी महज 8 बोरा मिली। जबकि, स्टॉक में 67 बोरा डीएपी बची हुई थी। फास्फेट पॉश मशीन में शून्य तो स्टॉक में 104 बैग पायी गयी। यूरिया के स्टॉक में भी अंतर पाया गया है।

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