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बक्सर में दो कमरे में चला 8वीं तक का स्कूल:एक की पढ़ाई होने पर दूसरे क्लास के बच्चें बाहर बैठे रहते

बक्सर जिले से 15 किलोमीटर दूरी पर एक ऐसा सरकारी विद्यालय है। जहां क्लास रूम और कार्यालय के नाम पर केवल दो रूम है। ऐसे में सरकारी उदासीनता के कारण 1 से 8 वर्ग तक के बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोचाढ़ी ऐसे में दो क्लास के बच्चो को एक साथ मिलाकर बैठाया जाता है।स्कूल में नामांकित बच्चे 510 है,बच्चों की उपस्थिति भी हर दिन लगभग नब्बे फीसदी होती है ।आज बच्चो की उपस्थिति 350 थी।लेकिन पढने-पढाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है।

बता दे कि सुबह भास्कर ने पहुंच देखा कि 1 -2 क्लास के बच्चे टिन के सेड के नीचे बैठ पढ़ाई कर रहे है।3-4 क्लास के बच्चे बारामदे और बरामदे के किनारे धूप में जमीन पर बैठे है।वही 7-8 क्लास के छात्र एक बेंच पर एक साथ बैठते है। 5-6 के छात्रो को कार्यालय में बैठा पठन पाठन का कार्य होता है।जिसमे पुस्तकालय,मिड डे मील का 10- 15 चावल की बोरिया और समान भरा पड़ा है।

इसके बदन बच्चो से बात चीत कर पढ़ाई के दौरान होने वाली परेशानियों से अवगत होना चाहा तो क्लास 8 की आकांक्षा कुमारी ने बताया कि एक रूम में दो वर्गों की पढ़ाई होने में सिलेबस पूरा नही हो पाता है।रूम के अभाव में शिक्षक की भी मजबूरी है।कभी 7 क्लास के बच्चो को तो कभी 8 क्लास के बच्चो को पढ़ाते है। तो वही एक क्लास की काजल कुमारी ने बताया कि सेड के नीचे पढ़ाई करने में गर्मी लगती है।अनु को आज उल्टी होने लगी जिसे घर भेज दिया गया।

स्कूल की शिक्षिक संतोष कुमार की माने तो बरसात और गर्मी में बच्चों को परेशानी होती ही है पढ़ाने में शिक्षकों को भी परेशान होना पड़ता है।स्कूल के जिन दो कमरे में दो-दो वर्गों की पढ़ाई होती है वहां अगर सातवीं की पढाई होती है तो आठवीं के छात्र बैठे रहते हैं और अगर आठवीं की होती है तो सातवीं के छात्र बैठे रहते हैं।कमरे के अभाव में बच्चो को पढानें में शिक्षक और स्कूल प्रबंधन को भी परेशानी होती है।

प्रभारी शिक्षक दिनेश राम द्वारा बताया गया कि यह स्कूल 50 साल से भी पुराना है।पुराने भवन जर्जर हो गये तो दस 12 साल पहले दो क्लास रूम वाले भवन का निर्माण कराया गया।तब जर्जर भवन और नए भवन को मिलाकर बच्चो को पढ़ाया जाता था।लेकिन जर्जर भवन के छत गिरने से दो छात्र और एक रसोइया का सर फट गया।जिसका उपचार हलोगों द्वारा कराया गया।उसके बाद जर्जर भवन को छोड़ टीन के सेड में और कर्यालय बरामदे में बच्चो को पढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।जहां पठन पाठन का कार्य परेशानी से हो पाता है।ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि इस स्कूल में पर्याप्त कमरे बने इसकी मांग कई बार हुई है लेकिन मिला तो सिर्फ आश्वासन।बताया गया कि जर्जर भवन को थर्मल पॉवर कम्पनी द्वारा बनाने की बात कही गई।लेकिन शिक्षा विभाग इसके लिए कई बार प्रयास करने के बाद NOC नही दे रहा है।जिससे ग्रामीणों में आक्रोश भी है।

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