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भागलपुर की पूनम चौधरी बनी महिलाओं के लिए मिसाल, पति बीमा’र हुए तो खुद चलाने लगीं टेंपो, जानें…

भागलपुर की पूनम चौधरी को बड़ा नाम नहीं है, पर उनका काम इतना बड़ा है कि बड़े-बड़ों का नाम छोटा पड़ जाए। क्योंकि पूनम मां के साथ पिता का भी फर्ज बखूबी निभा रही है। हाथों में स्टेयरिंग संभाल भागलपुर से जगदीशपुर टेंपो चलाती है। यह काम वह 2015 से कर रही है। पहली नजर सभी लोगों को आश्चर्य लगेगा कि कोई औरत भला कैसे कर सकती है। पर पूनम ने यह कर दिखाया। साथ ही पैसेंजर भी खुद को सुरक्षित महसूस करती है। पूनम दिनभर में भागलपुर से जगदीशपुर 5 पर राउंड लगाती हैं। इस आमदनी से घर से लेकर बाहर तक खर्च करती है।

बीमार पति व बेटी और बेटा के साथ घर पर बैठी पूनम ।

बीमार पति व बेटी और बेटा के साथ घर पर बैठी पूनम ।

7 साल से मां की भूमिका के साथ निभा रही है पिता की भूमिका

पूनम ने बताया कि पति 2015 से बीमार है। उनको चलने फिरने में काफी परेशानी होती है। इस कारण उनका काम बंद हो गया। काम बंद होने से घर की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो गई। इसके खुद आगेकर घर के साथ बाहर का भी मोर्चा संभाला। चुकी घर में टेंपो था, इसलिए मुझे यह काम करना ज्यादा आसान लगा। खुद का ड्राइविंग लाइसेंस बना लिया है। टेंपो चलाना ड्राइवर को देखते हुए सीखा है। भागलपुर से जगदीशपुर 5 से 6 ट्रिप टेंपो चलाती है। इससे दो आमदनी होती है उससे ही घर की सारी जरूरत पूरी होती है।

4 लोगों के परिवार का है भार, रोजाना लगाती हैं 5 चक्कर

पूनम ने बताया कि 2015 से टेंपो चला रही हूं। घर की स्थिति काफी दयनीय हुई तो इसके बाद मुझे टेंपो चलाना पड़ा। पति को बीमारी का इलाज के साथ दो बच्चों की परवरिश भी करनी थी। बड़ी बेटी 15 साल की है। वहीं बेटा 9 साल का है। पूनम ने कहा कि परेशानी तो जिंदगी में लगी रहेगी। दुख और सुख जीवन में लगा हुआ रहेगा। लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। बस अपना काम करते रहना चाहिए।

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