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कोरोना में गई नौकरी तो शुरू किया डेयरी फार्म, 4 गाय से शुरुआत के साथ आज डेयरी में 100 गाय

छपरा के रोमेश फैशन ने कोरोना काल में नौकरी छूट जाने के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को स्थापित करने के लिए कुछ नया सोचा और छपरा की धरती पर नई इबारत पेश कर दिया। चार गाय के साथ शुरू की गोशाला में आज सैकड़ों गाय हैं। रोमेश कोरोना से पहले एक मल्टी नेशनल कंपनी में बतौर मैनेजर काम करते थे। 17 लाख के आसपास पैकेज था, लेकिन महामारी में कंपनी ने उन्हें निकाल दिया। विदेश से नौकरी छुटने के बाद वह छपरा लौट गए। रोजी रोटी के लिए कुछ करने की सोची तो बड़े भाई राजेश फैशन ने डेयरी फार्म खोलने का सलाह दिया। फिर डेयरी फार्म का कारोबार शुरू हो गया। शुरू में 4 गायों के दूध से शुरुआत की और आज के समय में 100 गायों की आधुनिक सुसज्जित तरीके का कैटल फॉर्म हो गया है।

रोमेश फैशन के डेयरी फॉर्म पर अत्याधुनिक तरीके से गायों का देखभाल होता है। खूबसूरत बैरिकेड में गायों के रहने के लिए बाड़े बने हैं। प्रत्येक गाय के लिए गर्मी के मद्देनजर फैन और पानी के फुहारे तथा सर्दियों के लिए हॉट ब्लोअर लगाए गए हैं। दूध भी अत्याधुनिक वैक्युम मिल्किंग मशीन से किया जाता है। जिसे मिल्क कंटेनर में रखकर ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। रोमेश ने बताया कि दूध के निकालने से लेकर ग्राहक तक पहुंचाने में पूर्ण हाइजेनिक तरीके अपनाए जाते है। मिल्किंग मशीन से निकालने के बाद कांच के बोतल में वैक्यूम सील कर होम डिलिवरी के तहत घरों तक पहुंचाया जाता है।

4 गायों से की थी शुरुआत

डेयरी फार्मर रोमेश ने बताया कि चार गायों के साथ शुरुआत किए गए डेयरी फार्म में आज 100 के आसपास गाय और बछेड़ी रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के स्वरोजगार योजन से प्रेरित होकर खुद से कुछ करने को सोचा जिसके बाद परिवार वालों और दोस्तों का साथ मिलता गए जिसके बाद “मॉर्निंग इंडिया” के नाम से दूध का सप्लाई करने लगा। भविष्य में अत्याधुनिक तरीक़े दूध के सभी प्रोडक्शन मार्केट में उतारने का प्लान है। कमाई पर बात करते हुए कहा कि शुरू में तो परेशानी हुई लेकिन धीरे धीरे बदलाव दिख रहा है। सालाना 8 लाख के आसपास मुनाफा हो जाता है। फिलहाल पूरे फॉर्म में 15 के आसपास कर्मचारी काम करते हैं।

कैटल ब्रीडिंग की भी शुरुआत की

गुड मॉर्निंग डेयरी फार्म पर दूध के उत्पादन के साथ विशेष नस्ल की गाय से बछिया की ब्रीडिंग और कैटल फॉर्मिंग की भी शुरुआत की गई है। गिर, फ्रांसेसियन सहित कई नस्लों के गाय से ब्रीडिंग कर बछिया को पशुपालकों से बेचने का कार्य किया जा रहा है। अच्छे और उम्दा नस्ल के बछिया के लिए लोग अन्य प्रदेश से भी आ रहे हैं।

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