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बिहार के पूर्व राज्यपाल बूटा सिंह का नि’धन, लंबे समय से थे बीमा’र

कांग्रेस के सीनियर नेता और बिहार के पूर्व राज्यपाल रहे बूटा सिंह का निधन हो गया है. वह लंबे समय बीमा’र चल रहे थे.  21 मार्च 1934 को पंजाब के जालंधर जिले के मुस्तफापुर गांव में सरदार बूटा सिंह का जन्म हुआ था. वह 8 बार लोकसभा के लिए चुने गए थे. 

ब्रे’न है’मरेज के बाद हॉस्पिटल थे भर्ती

26 अक्टूबर को 86 साल के सरकार बूटा सिंह को ब्रेन हैमरेज हुआ था. जिसके बाद उनको दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था. यही पर उनका इलाज चल रहा था. जिसके बाद आज उनका नि’धन हो गया है. 

5 नवंबर से 2004 से 29 जनवरी 2006 राज्यपाल

बूटा सिंह 5 नवंबर 2004 से 29 जनवरी 2006 तक बिहार के राज्यपाल रहे थे. फरवरी 2005 में एक बार ऐसा हुआ था कि किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. एलजेपी अपना सीएम बनाने को अड़ी थी और एनडीए अपनी सरकार बनाने की कोशिश में थी. ऐसे में तत्कालीन राज्यपाल बूटा सिंह ने 22 मई की आधी रात विधानसभा भंग कर दी थी. इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताया था, हालांकि उस साल बिहार को दोबारा चुनाव में उतरना ही पड़ा था. 

राजीव गांधी के थे करीबी

बूटा सिंह को पंजाब के बड़े दलित नेता के रूप में जाना जाता था. वह राजीव गांधी के काफी करीबी नेता थे. बूटा सिंह राजीव गांधी सरकार में गृह मंत्री भी रहे थे. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 1967 से लगातार पंजाब के रोपड़ चुनाव लड़ते आ रहे थे. 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और 84 के सिख विरोधी दंगे थे तो पंजाब में चुनाव के हालात नहीं थे. जिसके बाद राजीव गांधी ने बूटा सिंह को पंजाब से राजस्थान भेज दिया था. मारवाड़ का इलाका और जालौर की सुरक्षित सीट पर बूटा सिंह ने आसानी से जीत दर्ज की. इस बार वह दो वर्षों तक कृषि मंत्री और फिर गृहमंत्री का पद संभालते रहे. 

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