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अभी सिर्फ वयस्कों को दी जाएगी कोरोना वैक्सीन, बच्चों को करना होगा लंबा इंतजार

नई दिल्ली. दुनियाभर में एक बार फिर तेजी से कोरोना वायरस (Coronavirus) का संक्रमण बढ़ता दिखाई दे रहा है. कोरोना (Corona) के बढ़ते संक्रमण के बीच अब वैक्सीन (Vaccine) को लेकर भी चर्चा जोर पकड़ती जा रही है. कई वैक्सीन कंपनियों को टीके के आपात इस्तेमाल की अनुमति भी मिल गई है. एक अनुमान के मुताबिक अगले साल की शुरुआत में कोरोना वैक्सीन आम लोगों के लिए उपलब्ध हो जाएगी. ऐसे में इस साल के अंत तक लाखों वयस्कों को तो कोरोना वायरस का टीका लगाया जा चुका होगा लेकिन बच्चों को अभी भी वैक्सीन के लिए लंबा इंतजार करना होगा.

बच्चों में वैक्सीन की देरी की सबसे बड़ी वजह ये है कि उन्हें इसके ट्रायल में शामिल नहीं किया गया है. ऐसे में ये वैक्सीन बच्चों के लिए कितनी सुरक्षित है इसके बारे में दवा कंपनियों को अभी जानकारी नहीं है. दवा कंपनियां कोरोना वैक्सनी बाजार में आने के बाद बच्चों के लिए भी ट्रायल शुरू करेंगी. हालांकि, ब्रिटेन ने फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन को इस विकल्प के साथ अनु​मति दी जा चुकी है कि आपातकालीन स्थिति में बच्चों का भी टीकाकरण किया जा सकता है.

​अमेरिका में एमोरी वैक्सीन सेंटर के निदेशक डॉ रफी अहमद ने कहा है कि फिलहाल हम वैक्सीन में बच्चों को शामिल नहीं कर रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि बच्चों को अभी तक के ट्रायल में शामिल नहीं किया गया है. हमें ये भी पता नहीं है जो वैक्सीन तैयार की गई है बच्चों के लिए कितनी सुरक्षित है. दवा कंपनियों में से कुछ ने बच्चों पर अलग ट्रायल शुरू करने की योजना बनाई है.

बता दें कि वैक्सीन निर्माता कंपनी फाइजर और मॉडर्ना ने कुछ ही दिन पहले बच्चों पर भी वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल की शुरू की है. बच्चों पर किया जाने वाले ट्रायल वयस्कों से काफी अगल और ​कठिन होता है. इस ट्रायल के तहत दवा कंपनियों को लंबी सुरक्षा अवधि, सही सुरक्षा मापदंड और वैक्सीन के दो ट्रायल के बीच के अंतर की सही तरीके से जांच करनी होती है. ताकि बच्चों कपर वैक्सीन के बेहतर नतीजों का प्रयोग किया जा सके. इस प्रक्रिया में लगभग एक साल लगने की उम्मीद है.

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